PM Modi Indonesia visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों अपने तीन देशों के दौरे के पहले चरण के तहत इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में हैं। यह दौरा भारत और इंडोनेशिया के कूटनीतिक इतिहास में एक बेहद यादगार मोड़ लेकर आया है। जकार्ता के राष्ट्रपति भवन, इस्ताना मर्देका में आयोजित एक भव्य और औपचारिक समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ (Bintang Adipurna) से नवाजा है। इस सम्मान को दोनों देशों के बीच तेजी से गहरे होते रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया के कई देशों से प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं और अब उनके नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। हमेशा की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री ने इस गौरव को व्यक्तिगत उपलब्धि न मानकर देश को समर्पित किया। सम्मान ग्रहण करने के बाद उन्होंने इसे भारत के करोड़ों नागरिकों और दोनों देशों के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और भरोसेमंद सांस्कृतिक संबंधों का सम्मान बताया।
क्या है ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ और क्यों माना जाता है यह सबसे खास?
अगर हम इस सम्मान के इतिहास और इसकी अहमियत को समझें, तो ‘बिंतांग रिपब्लिक इंडोनेशिया आदिपूर्णा’ वहां का सबसे बड़ा और सबसे प्रतिष्ठित सरकारी मेडल है। इस सम्मान की स्थापना साल 1959 में की गई थी। यह खास तौर पर उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने इंडोनेशिया की अखंडता, राष्ट्रीय समृद्धि, विकास की निरंतरता और देश के हितों के लिए कोई असाधारण या बेहद महत्वपूर्ण काम किया हो।

यह मेडल देश के नागरिकों के साथ-साथ सैन्य अधिकारियों को भी उनकी विशेष सेवाओं के लिए दिया जाता है। लेकिन जब बात विदेशी नेताओं की आती है, तो यह सम्मान हर किसी को नहीं मिलता। विदेशी राष्ट्रप्रमुखों को यह मेडल केवल तभी दिया जाता है जब उन्होंने इंडोनेशिया के साथ अपने देश के द्विपक्षीय संबंधों को एक बिल्कुल नए और ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचाया हो। प्रधानमंत्री मोदी को यह मेडल मिलना यह साफ करता है कि इंडोनेशिया की नजर में भारत के साथ उनकी दोस्ती कितनी अहम और रणनीतिक रूप से जरूरी हो चुकी है।
सम्मान मिलने पर प्रधानमंत्री मोदी ने क्या संदेश दिया?
मेडल स्वीकार करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए इंडोनेशियाई सरकार और वहां की जनता का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि इस्ताना मर्देका में मिला यह स्नेह और गर्मजोशी भरा स्वागत दोनों देशों के गहरे जुड़ाव को दिखाता है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह सम्मान भारत और इंडोनेशिया के बीच के आपसी विश्वास को दर्शाता है।
पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और इंडोनेशिया की यह दोस्ती आने वाले समय में वैश्विक मंच पर और मजबूत होगी। उन्होंने इस सम्मान को भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और ‘महासागर विजन’ के प्रति देश की अटूट प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने वाली ऊर्जा के रूप में देखा।

भारत-इंडोनेशिया रक्षा संबंध और रणनीतिक साझेदारी
इस यात्रा के दौरान केवल सम्मान ही नहीं मिला, बल्कि पर्दे के पीछे दोनों देशों के बीच भविष्य के कई बड़े रणनीतिक समझौतों की नींव भी रखी गई है। हाल के सालों में भारत-इंडोनेशिया रक्षा संबंध काफी तेजी से आगे बढ़े हैं। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक सुरक्षित, खुला और समावेशी माहौल चाहते हैं। इस दौरे पर रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और बढ़ाने पर चर्चा हुई है, जिसमें रक्षा उद्योगों के बीच तालमेल और द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों का दायरा बढ़ाना शामिल है।
इसके साथ ही, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने, बुनियादी ढांचे के विकास और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच नई गति देखने को मिल रही है। यह साझेदारी आने वाले समय में न सिर्फ दोनों देशों के आर्थिक विकास को रफ्तार देगी बल्कि पूरे एशियाई क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में भी एक बड़ी भूमिका निभाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह इंडोनेशिया यात्रा सिर्फ मुलाकातों और औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों को एक नई कूटनीतिक ऊंचाई दी है। ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ सम्मान मिलना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। रक्षा, व्यापार और संस्कृति के मोर्चे पर भारत और इंडोनेशिया का यह साथ आने वाले दिनों में दोनों देशों के नागरिकों के लिए तरक्की के नए दरवाजे खोलेगा।
यह भी पढ़ें: PM Modi Indonesia visit: भारत के लिए क्यों बेहद खास है यह दौरा ?







