India First Green Hydrogen Train : देश की पहली ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन: पटरियों पर दौड़ने को तैयार प्रदूषण-मुक्त सफर

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India First Green Hydrogen Train : भारतीय रेलवे के इतिहास में एक बेहद खास और नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारत पर्यावरण को सुरक्षित रखने और प्रदूषण कम करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में अब India First Green Hydrogen Train लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार है। इसे स्वच्छ, हरित और शून्य-उत्सर्जन (जीरो एमिशन) परिवहन की दिशा में देश का एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस नई ट्रेन की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “India First Green Hydrogen Train हरियाणा से शुरू होने जा रही है।” पीएम मोदी की इस घोषणा के बाद से ही इस नए प्रोजेक्ट को लेकर देशवासियों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।

‘India First Green Hydrogen Train’ पहल से बदलेगी तस्वीर

यह नई ट्रेन भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ का एक मुख्य हिस्सा है। इस खास योजना के तहत रेलवे का लक्ष्य आने वाले समय में करीब 35 और नई हाइड्रोजन ट्रेनों को चलाने का है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के ऐतिहासिक (हेरिटेज) और ग्रामीण रेल मार्गों पर सालों से चल रहे पुराने डीजल इंजनों को हटाना है। उनकी जगह पर्यावरण के अनुकूल और बिना धुआं छोड़ने वाली आधुनिक ट्रेनें चलाई जाएंगी ताकि हमारी सांस्कृतिक धरोहरों और ग्रामीण पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

75 की रफ्तार और 2600 यात्रियों का सफर

तकनीकी रूप से देखें तो इस नई ट्रेन को 10 कोच वाले विशेष हाइड्रोजन-चालित डीईएमयू (DEMU) सेट के रूप में डिजाइन किया गया है। ट्रेन के भीतर 682 आरामदायक सीटें लगाई गई हैं, जबकि इसमें एक बार में कुल 2,600 यात्री सफर कर सकेंगे। हालांकि ट्रायल के दौरान इस ट्रेन ने इससे कहीं अधिक रफ्तार पकड़ी थी, लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमित संचालन के दौरान इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। पायलट प्रोजेक्ट होने की वजह से इसे पूरी सावधानी के साथ शुरू किया जा रहा है।

बिना धुएं के पानी की भाप छोड़ेगा यह चलता-फिरता बिजलीघर

वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यह ट्रेन किसी चलते-फिरते बिजलीघर की तरह काम करती है। इसमें लगे फ्यूल सेल के अंदर हाइड्रोजन गैस और हवा में मौजूद ऑक्सीजन का मिलाप कराया जाता है। इस रासायनिक प्रक्रिया से सीधे बिजली बनती है, जो ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को चलाती है। इस पूरे सफर के दौरान किसी भी प्रकार का जहरीला धुआं या प्रदूषण नहीं होता, बल्कि साइलेंसर से सिर्फ पानी की बूंदें (जलवाष्प) और थोड़ी गर्मी बाहर निकलती है। India First Green Hydrogen Train  का आना भारतीय रेलवे को पूरी तरह कार्बन मुक्त बनाने के सफर में एक मील का पत्थर साबित होगा। जिन दुर्गम रास्तों पर बिजली के बड़े-बड़े खंभे और ओवरहेड तार लगाना नामुमकिन या बेहद खर्चीला था, वहां अब बिना किसी बड़े बदलाव के यह ट्रेन प्रदूषण-मुक्त सफर का आनंद देगी। यह भारत के हरित भविष्य के लिए एक बेहतरीन शुरुआत है।

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