STF Encounter : उत्तर प्रदेश से अपराध और अपराधियों के खात्मे को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। यूपी एसटीएफ (STF) ने एक बार फिर बड़ी कामयाबी हासिल की है। कई सालों से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे और यूपी-बिहार के लिए सिरदर्द बन चुके कुख्यात अपराधी ललन सिंह का खेल अब हमेशा के लिए खत्म हो गया है। एसटीएफ ने सहारनपुर में एक मुठभेड़ के दौरान उसे मार गिराया। आइए जानते हैं कि कौन था यह अपराधी और क्यों पुलिस इसकी परछाई को तलाश रही थी।
सहारनपुर में हुआ एनकाउंटर
यूपी एसटीएफ को खुफिया जानकारी मिली थी कि ललन सिंह सहारनपुर के इलाके में छुपा हुआ है। जब टीम ने उसे घेरने की कोशिश की, तो उसने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एसटीएफ ने भी गोलियां चलाईं, जिसमें वह ढेर हो गया। ललन सिंह पर यूपी और बिहार में कई संगीन मामले दर्ज थे और पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में जुटी थी।
दरोगा अजय यादव कांड से आया था सुर्खियों में
ललन सिंह का नाम उत्तर प्रदेश पुलिस की हिट लिस्ट में तब सबसे ऊपर आया, जब उसने साल 2022 में वाराणसी में एक दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया था। रोहनिया थाना क्षेत्र में तैनात सब-इंस्पेक्टर अजय यादव जब अपने एक निर्माणाधीन मकान को देखने गए थे, तब ललन ने अपने भाइयों के साथ मिलकर उन पर हमला कर दिया। बदमाशों ने दरोगा को गोली मारी और उनकी सरकारी पिस्टल और पर्स लूटकर फरार हो गए थे। इसी मामले के बाद वह वाराणसी से एक लाख के इनामी के रूप में जाना जाने लगा और चंदौली पुलिस ने भी उस पर 25 हजार का इनाम रखा था।

बिहार में बैंक डकैती और हत्याओं का तांडव
ललन सिंह और उसके गिरोह का खौफ सिर्फ यूपी तक ही सीमित नहीं था, बल्कि बिहार में तो उसने आतंक मचा रखा था। साल 2017 में पटना के बेलछी इलाके में एक पीएनबी (PNB) बैंक के सामने ललन और उसके साथियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। इस खूनी खेल में बैंक के दो सुरक्षा गार्ड और एक कैश वैन चालक की मौके पर ही मौत हो गई थी, जिसके बाद बदमाश वहां से करीब 60 लाख रुपये लूटकर फरार हो गए थे। इसके अलावा नालंदा में भी एक कैश वैन पर हमला करके उसने गार्ड और कैशियर की हत्या की थी और 20 लाख रुपये उड़ा लिए थे।
पुलिसकर्मियों को निशाना बनाना था इसकी फितरत
ललन सिंह का आपराधिक इतिहास बताता है कि वह पुलिसवालों पर हमला करने से कभी नहीं कतराता था। वाराणसी के दरोगा अजय यादव से पहले, साल 2016 में उसने पटना के फतुहा में ड्यूटी पर तैनात सब-इंस्पेक्टर आर.आर. चौधरी की भी गोली मारकर हत्या कर दी थी और उनकी सरकारी पिस्टल लूट ली थी। उसी साल बाढ़ थाना क्षेत्र में भी एक एएसआई (ASI) सुरेश ठाकुर की हत्या में उसका हाथ सामने आया था।
देखा जाए तो ललन सिंह और उसके भाइयों ने पटना, नालंदा, वाराणसी और चंदौली जैसे जिलों में अपराध का एक ऐसा नेटवर्क खड़ा कर लिया था जिसे तोड़ना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन चुका था। लेकिन आखिरकार, एक लाख के इनामी ललन सिंह का अंत पुलिस एनकाउंटर में ही हुआ। कानून के हाथ कितने भी लंबे हों, अपराधियों का अंजाम ऐसा ही होता है। इस कार्रवाई पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट में जरूर बताएं।
