हम जब भी बीमार पड़ते हैं, तो आंखें बंद करके डॉक्टरों की लिखी दवाओं पर भरोसा कर लेते हैं। लेकिन क्या बाजार में मिलने वाली हर दवा पूरी तरह सुरक्षित है? देश में दवाओं की शुद्धता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) लगातार अपनी नजर बनाए हुए है। इसी सिलसिले में मई 2026 की मासिक जांच रिपोर्ट सामने आई है, जिसने सेहत को लेकर हमारी चिंता थोड़ी बढ़ा दी है।
जांच में क्या आया सामने
CDSCO की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग प्रयोगशालाओं में किए गए परीक्षण के दौरान कुल 159 दवा नमूनों को मानक गुणवत्ता से कम यानी ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ पाया गया है। इनमें से 46 नमूनों को केंद्रीय प्रयोगशालाओं ने और 113 नमूनों को राज्यों की प्रयोगशालाओं ने फेल किया है। जब किसी दवा के बैच को इस श्रेणी में डाला जाता है, तो इसका मतलब है कि वह सरकारी पैमानों पर खरी नहीं उतरी है।

नकली दवाओं पर भी एक्शन
इस बार की रिपोर्ट में सिर्फ गुणवत्ता की कमी ही नहीं, बल्कि असम से एक नकली दवा का गंभीर मामला भी पकड़ा गया है। वहां एक अनधिकृत निर्माता दूसरी बड़ी कंपनी के नाम का गलत इस्तेमाल कर दवाएं बेच रहा था। प्रशासन ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है और दोषियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। हालांकि, विभाग ने साफ किया है कि यह दिक्कत केवल जांचे गए खास बैच में थी, पूरी बाजार की दवाओं पर इसका असर नहीं है।
CDSCO और राज्य नियामकों की यह मुस्तैदी बेहद जरूरी है ताकि खराब और नकली दवाएं समय रहते बाजार से हटाई जा सकें। एक जागरूक नागरिक के तौर पर हमें भी दवाएं खरीदते समय हमेशा एक्सपायरी डेट और बैच नंबर जैसी जरूरी चीजें जांच लेनी चाहिए।
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