IIT Kanpur Hospital : कानपूर और उसके आसपास के जिलों में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बहुत ही अच्छी खबर आई है। अब गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए आपको दिल्ली, मुंबई या किसी अन्य बड़े शहर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। हमारे अपने शहर में ही एम्स जैसी आधुनिक और विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं बहुत जल्द शुरू होने वाली हैं। आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने घोषणा की है कि संस्थान के परिसर में बनकर तैयार हुआ IIT Kanpur Hospital इसी साल नवंबर के महीने से मरीजों के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा।
नवंबर से शुरू होने जा रही हैं सुपरस्पेशलिटी सेवाएं
इस अस्पताल का नाम यदुपति सिंहानिया सुपरस्पेशलिटी अस्पताल रखा गया है, जिसका संचालन गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के तहत किया जाएगा। पहले चरण में यह 500 बेड के अस्पताल के रूप में शुरू हो रहा है, जहां मरीजों को उपचार के साथ-साथ चिकित्सा अनुसंधान की भी सुविधा मिलेगी। IIT Kanpur Hospital में मरीजों को कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और पीडियाट्रिक केयर जैसी बेहतरीन सुपरस्पेशलिटी सेवाएं मिलेंगी। इसके साथ ही, सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों को तुरंत बचाने के लिए यहां एक अत्याधुनिक ट्रामा एंड इमरजेंसी केयर सेंटर भी बनाया गया है।
इंजीनियरिंग और मेडिकल साइंस का अनोखा संगम
इस नए मेडिकल स्कूल और अस्पताल की सबसे खास बात यह है कि इसे सिर्फ इलाज के लिए ही नहीं, बल्कि गंभीर रिसर्च के लिए भी तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मेडिकल साइंस और इंजीनियरिंग को एक-दूसरे के नजदीक लाना है। इसके जरिए चिकित्सा के क्षेत्र में काम आने वाले आधुनिक उपकरणों का रिसर्च और विकास यहीं किया जा सकेगा। IIT Kanpur Hospital के दूसरे चरण में मेडिकल क्षेत्र के छात्रों के लिए परास्नातक (पीजी) और पीएचडी जैसे कोर्सेज भी शुरू किए जाएंगे, जिससे देश को बेहतरीन डॉक्टर और वैज्ञानिक मिल सकेंगे।
देश-विदेश के डॉक्टरों का मिलेगा सहयोग
लगभग 30 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस चिकित्सा केंद्र को बनाने में आईआईटी के पूर्व छात्रों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इसके लिए पूर्व छात्र राकेश गंगवाल ने 100 करोड़ रुपये की शुरुआती मदद दी, वहीं यदुपति सिंहानिया के परिवार ने भी बड़ा आर्थिक सहयोग दिया है। इस IIT Kanpur Hospital की खासियत यह भी है कि यहां भारत के नामी डॉक्टरों के साथ-साथ अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों के बड़े विशेषज्ञ विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर जुड़ रहे हैं। इससे मरीजों को इलाज तो अच्छा मिलेगा ही, साथ ही मेडिकल रिसर्च को भी बढ़ावा मिलेगा।







