Bareilly bulldozer action: CM Grid Yojana के लिए कोहाड़ापीर रोड पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई

Bareilly bulldozer action

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Bareilly bulldozer action: उत्तर प्रदेश के Bareilly जिले में विकास कार्यों को गति देने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने और सड़कों को चौड़ा करने के लिए नगर निगम की टीम ने पुलिस बल के साथ मिलकर एक बड़ा अभियान चलाया। इस कार्रवाई के तहत कोहाड़ापीर से लेकर कुदेशिया रोड तक सड़क के दोनों किनारों पर किए गए अवैध कब्जों को ढहा दिया गया। जैसे ही सुबह-सुबह इलाके में तीन बुलडोजर (bulldozer) पहुंचे, वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय दुकानदारों और मकान मालिकों में हड़कंप मच गया है।

सीएम ग्रिड योजना (CM-GRID)

यह पूरी कवायद मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (CM-GRID) योजना के दूसरे चरण के तहत की जा रही है। इस योजना का मकसद शहर की मुख्य सड़कों का सौंदर्यीकरण और चौड़ीकरण करना है ताकि लोगों को रोज-रोज के जाम से मुक्ति मिल सके। इसी क्रम में कोहाड़ापीर रोड को चौड़ा करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। नगर निगम ने पहले ही सर्वे करके उन जमीनों पर लाल निशान लगा दिए थे, जो सड़क के दायरे में आ रही थीं। सोमवार को इन्हीं निशानों के आधार पर सात से लेकर 17 फुट तक के अवैध निर्माणों को हटा दिया गया।

Bareilly bulldozer action

प्रशासन की इस कार्रवाई के दौरान GRAM स्कूल की बाहरी दीवार को भी तोड़ दिया गया, जिसके बाद मौके पर काफी हंगामा और विरोध देखने को मिला। स्कूल प्रबंधन का आरोप है कि नगर निगम ने उन्हें कोई स्पष्ट नपाई रिपोर्ट नहीं दी और बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे दीवार गिरा दी। स्कूल के डायरेक्टर का कहना था कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यह कार्रवाई छुट्टियों के दौरान की जानी चाहिए थी। वहीं दूसरी ओर, नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने साफ किया कि स्कूल को पहले कई बार नोटिस दिए गए थे, लेकिन जब उनकी तरफ से कब्जा नहीं हटाया गया, तब जाकर यह कदम उठाया गया।

कोहाड़ापीर रोड

कार्रवाई के दौरान कोहाड़ापीर रोड पर माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने प्रशासन पर भेदभाव का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि सड़क के एक तरफ 10 फुट और दूसरी तरफ करीब 17 फुट पर निशान लगाए गए हैं, जो कि न्यायसंगत नहीं है। कई दुकानदारों का दावा है कि उनके निर्माण साल 1987 से भी पहले के हैं। हालांकि, नुकसान से बचने के लिए बहुत से लोग खुद ही हथौड़ा लेकर अपने निर्माणों को सुरक्षित ढंग से तोड़ने में जुट गए।

नगर निगम की कार्रवाई

नगर निगम के अधिकारियों ने जनता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई नियमों के मुताबिक ही की गई है। सहायक अभियंता मुकेश शाक्य ने बताया कि पूरी पैमाइश और नपाई के बाद ही लाल निशान लगाए गए थे और प्रभावित लोगों को नियमानुसार पहले ही सूचित कर दिया गया था।

नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि सड़क चौड़ीकरण कार्य में बाधा बन रहे चिन्हित अवैध निर्माणों को नोटिस देने के बाद हटाया गया है। उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए अतिक्रमण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। नगर निगम ने लोगों से सार्वजनिक भूमि पर कब्जा न करने की अपील की है।

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