Sambhal Vardhman river news: उत्तर प्रदेश के संभल (Sambhal) जिले से पर्यावरण और जल संरक्षण को लेकर एक बेहद सुखद तस्वीर सामने आई है। वर्षों से सूखी और गुमनाम पड़ी वर्धमार नदी एक बार फिर अपने पुराने और प्राकृतिक स्वरूप में लौट आई है। जैसे ही इस साल मानसून की पहली अच्छी बारिश हुई, नदी के सूखे रास्तों में पानी की कलकल गूंजने लगी। इस नजारे को देखकर न केवल स्थानीय ग्रामीण और किसान बेहद खुश हैं, बल्कि जिला प्रशासन की मेहनत भी सफल होती दिख रही है। यह सब मुमकिन हुआ है स्थानीय प्रशासन की दूरदर्शिता और सामूहिक प्रयासों की बदौलत, जिसने एक मृतप्राय नदी को दोबारा जीवन दे दिया है।
Sambhal Vardhman river
वर्धमार नदी Sambhal जिले की एक प्राचीन और ऐतिहासिक जलधारा है। लगभग 14.5 किलोमीटर लंबी यह नदी गुन्नौर और जुनावई क्षेत्र के 11 ग्राम पंचायतों से होकर गुजरती है और आगे जाकर महावा नदी में मिल जाती है। समय के साथ उपेक्षा, गाद जमा होने और बड़े पैमाने पर हुए अवैध अतिक्रमण के कारण इस नदी का अस्तित्व लगभग खत्म हो गया था। यह नदी पूरी तरह से एक सूखे मैदान या नाले में तब्दील हो चुकी थी। लेकिन आज इस नदी में फिर से पानी बह रहा है, जिससे इस पूरे इलाके की सूरत बदलने वाली है।
संभल प्रशासन
इस प्राचीन धरोहर को बचाने के लिए संभल प्रशासन ने एक सराहनीय प्रशासनिक कदम उठाया। जिला प्रशासन ने नदी के महत्व को समझा और इसे पुनर्जीवित करने का एक ठोस खाका तैयार किया। इस काम में स्थानीय लोगों और राजस्व विभाग की मदद ली गई ताकि नदी के बहाव क्षेत्र को पूरी तरह साफ किया जा सके और पानी के रास्ते में आने वाली सभी रुकावटों को हमेशा के लिए दूर किया जा सके।
एक जनपद-पांच नदियां
प्रशासन ने इस नदी को नया जीवन देने के लिए ‘एक जनपद-पांच नदियां’ नाम से एक विशेष अभियान की शुरुआत की थी। इसी अभियान के तहत बीते 6 जून को इस मुहिम को जमीन पर उतारा गया। नदी के पुनरुद्धार के काम की शुरुआत पूरे विधि-विधान, पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की गई थी। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में जेसीबी मशीनों को काम पर लगाया गया। मशीनों की मदद से वर्षों से जमा गाद और मिट्टी को हटाया गया, जिससे नदी की मूल धारा का रास्ता साफ हो गया।
नदी पुनर्जीवन अभियान
इस नदी पुनर्जीवन अभियान का सबसे बड़ा और कड़ा हिस्सा था नदी की जमीन से अवैध अतिक्रमण को हटाना। कई जगहों पर लोगों ने नदी की जमीन पर कब्जे कर लिए थे, जिससे उसका प्राकृतिक प्रवाह रुक गया था। प्रशासन ने बिना किसी दबाव के पूरी कड़ाई से इस अतिक्रमण को मुक्त कराया। सालों बाद जब नदी में पानी का बहाव शुरू हुआ, तो बुजुर्गों की पुरानी यादें ताजा हो गईं और नई पीढ़ी को अपनी पारंपरिक नदी को जीवंत रूप में देखने का मौका मिला।
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भूजल स्तर
इस पहल का सबसे बड़ा फायदा सीधे तौर पर प्रकृति और खेती-किसानी को मिलने वाला है। नदी में पानी रहने से आसपास के इलाकों का भूजल स्तर काफी सुधरेगा, जिससे कुओं और नलकूपों में पानी की कमी नहीं होगी। इसके अलावा, किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए आसानी से पानी मिल सकेगा। पौराणिक रूप से भी संभल को भगवान विष्णु की नगरी कहा जाता है, जहां कई देव तीर्थ और जल तीर्थ हैं। ऐसे में इस पवित्र जलधारा का लौटना धार्मिक लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वर्धमार नदी का दोबारा बहना इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी एक साथ मिल जाए, तो विलुप्त हो चुकी नदियों को भी बचाया जा सकता है। संभल प्रशासन का यह कदम पर्यावरण संतुलन और जल सुरक्षा के लिए एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। अब यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम इस नदी को स्वच्छ रखें और इसमें किसी भी तरह का कचरा न बहाएं ताकि यह जलधारा हमेशा ऐसे ही बहती रहे।







