US-Iran peace agreement: दुनियाभर की नजरें पिछले कई महीनों से मध्य पूर्व में चल रही उठापटक पर टिकी हुई थीं, लेकिन अब वहां से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और Iran के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने दोनों देशों के बीच चल रहे सैन्य टकराव को रोकने के लिए एक सहमति पत्र यानी MoU पर साइन कर दिए हैं। पिछले चार महीनों से दोनों मुल्कों के बीच जो भारी तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई थी, वह इस समझौते के साथ ही फिलहाल थम गई है। दोनों तरफ के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू भी हो चुका है।

France के वर्सेलिस पैलेस में लगी मुहर
इस पूरे घटनाक्रम में डिप्लोमेसी की रफ्तार काफी तेज देखने को मिली। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर सामने आई है कि राष्ट्रपति Donald Trump ने फ्रांस के मशहूर पैलेस ऑफ वर्सेलिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ डिनर के दौरान इस समझौते के मुख्य दस्तावेजों पर अपने दस्तखत किए। ट्रंप ने वहां मौजूद एग्रीमेंट की हार्ड कॉपी पर बकायदा साइन किए, जिसे बाद में ईरान और इस बातचीत में मध्यस्थता कर रहे देशों को भेज दिया गया।
दिलचस्प बात यह है कि मुख्य राष्ट्रपतियों के साइन होने से ठीक पहले, रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने इसी MOU पर डिजिटल यानी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हस्ताक्षर किए थे। इससे यह साफ हो गया था कि बैकचैनल बातचीत काफी समय से सही दिशा में आगे बढ़ रही थी।

Geneva में होने वाली बैठक का क्या होगा?
इस समझौते के बाद अब Switzerland के जिनेवा में होने वाली आगामी बैठक को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक, शुक्रवार को दोनों देशों के राजनयिकों और वार्ता दलों को जिनेवा में इकट्ठा होना है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने यह साफ कर दिया है कि इस बैठक का मकसद अब किसी नए कागजात पर दस्तखत करना नहीं है, क्योंकि मुख्य एमओयू पर डिजिटल और फिजिकल रूप से पहले ही मुहर लग चुकी है।
अब यह बैठक सिर्फ आगे की रूपरेखा तय करने के लिए होगी या इसे टाल दिया जाएगा, इस पर आखिरी फैसला अगले कुछ घंटों में आने की उम्मीद है। चूंकि दस्तावेज पर पहले ही दस्तखत हो चुके हैं, इसलिए अब Switzerland में किसी बड़े औपचारिक हस्ताक्षर समारोह की जरूरत नहीं रह गई है।

तेल व्यापार और आर्थिक प्रतिबंधों से राहत
Iran के लिए यह समझौता आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी संजीवनी जैसा साबित हो सकता है। Iran के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इस बारे में खुलकर अपनी बात रखी है। ईरान की सबसे बड़ी मांग यही है कि उसे अपने कच्चे तेल की बिक्री बिना किसी पाबंदी, परिवहन बाधा या बीमा संबंधी दिक्कतों के करने की पूरी आजादी मिले। साथ ही तेल बेचने से जो कमाई हो, वह सीधे ईरान के खातों तक पहुंचे।
इसके अलावा, America ने Iran की उन संपत्तियों को भी फ्रीज (जब्त) सूची से बाहर निकालने का भरोसा दिया है जो लंबे समय से रुकी हुई थीं। समझौते के तहत दोनों देशों ने तय किया है कि अगले 60 दिनों तक वे पूरी तरह संयम बरतेंगे। इस दौरान कोई भी ऐसा आर्थिक, राजनीतिक या सैन्य कदम नहीं उठाया जाएगा जिससे इस शांति प्रक्रिया को कोई नुकसान पहुंचे।
देखें तो यह America-Iran शांति समझौता मध्य पूर्व के संकट को टालने की दिशा में एक बड़ा शुरुआती कदम है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि यह सिर्फ एक शुरुआती ढांचा है और असली परीक्षा अगले 60 दिनों की बातचीत के दौरान होगी, जहां अंतिम समझौते की बारीक शर्तें तय की जाएंगी। अगर दोनों पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं पर टिके रहते हैं, तो आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए यह बेहद मददगार साबित होगा।







