Strait of Hormuz : दुनिया के सबसे संवेदनशील और जरूरी समुद्री रास्तों में से एक से वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। पिछले कुछ समय से तनाव का केंद्र रहे एक बेहद संकरे समुद्री गलियारे में अचानक से जहाजों की रौनक लौट आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए बड़े टकरावों और प्रतिबंधों के बाद इस रूट पर व्यापार पूरी तरह थम सा गया था, लेकिन अब यहाँ से एक बार फिर कमर्शियल जहाजों की भारी आवाजाही शुरू हो चुकी है। आइए जानते हैं कि इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर अचानक यह बदलाव कैसे आया।
पिछले 24 घंटों के भीतर वैश्विक तेल और गैस सप्लाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही में एक बड़ा उछाल देखा गया है। मरीन ट्रैफिक और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के डेटा के अनुसार, बड़ी संख्या में कमर्शियल जहाज अब ईरान के ट्रैफिक लेन का इस्तेमाल करके अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रहे हैं। इस अचानक बढ़ी गतिविधि की मुख्य वजह यह है कि तेहरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ चले लंबे टकराव के बाद अपने सख्त प्रतिबंधों में थोड़ी ढील दी है और जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए एक नया रास्ता तैयार किया है।
ईरानी नेवी ने दी बड़े जहाजों को मंजूरी
इस समुद्री रास्ते पर जहाजों का गुजरना उस वक्त रफ्तार पकड़ा जब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) नेवी ने आधिकारिक तौर पर इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में तेल टैंकरों और बड़े कंटेनर जहाजों सहित कुल 26 कमर्शियल जहाजों को इस जलमार्ग से सुरक्षित गुजरने की इजाजत दी गई है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा आवागमन उनकी नौसेना द्वारा प्रदान किए गए आपसी तालमेल और सुरक्षा घेरे के कारण ही मुमकिन हो पाया है।
युद्ध के बाद पहली बार हटा गतिरोध
आपको याद दिला दें कि इस साल फरवरी में अमेरिका और इजरायल के साथ शुरू हुए भारी तनाव के बाद से ईरान ने Strait of Hormuz से होकर जाने वाले जहाजों पर बहुत कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। ईरान का साफ कहना था कि भले ही अप्रैल के महीने में युद्धविराम हो गया हो, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से इस जलमार्ग का उपयोग करने वाले हर जहाज को पहले ईरानी प्रशासन से बकायदा अनुमति लेनी होगी। इस कड़ाई के बीच हाल ही में दक्षिण कोरिया का एक बड़ा तेल टैंकर यहाँ से सफलतापूर्वक पार हुआ है, जो युद्ध की शुरुआत के बाद से इस देश के किसी जहाज की पहली आवाजाही है।
वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का सबसे बड़ा लाइफलाइन
भौगोलिक और आर्थिक दृष्टि से यह संकरा गलियारा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चलाता है। फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय समंदर से जोड़ने वाला यह रूट दुनिया भर के कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई का सबसे मुख्य जरिया बना हुआ है। अगर इस रास्ते में थोड़ी सी भी रुकावट आती है, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम आसमान छूने लगते हैं। यही वजह है कि इस रूट पर जहाजों का दोबारा लौटना वैश्विक बाजार के लिए एक बहुत बड़ा सकारात्मक संकेत है।
ईरान ने बनाया नया समुद्री प्राधिकरण
इस पूरे क्षेत्र पर अपना प्रशासनिक नियंत्रण और कड़ा करने के लिए तेहरान ने एक बड़ा कदम उठाया है। ईरान की तरफ से एक नए “फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण” को बनाने की घोषणा की गई है, जिसका सीधा काम इस व्यस्त रूट पर होने वाले समुद्री यातायात की हर पल निगरानी करना होगा। यह नया कदम साफ दिखाता है कि ईरान भविष्य में भी इस सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्ग पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखना चाहता है।







