Fake Doctor Racket : हमारे स्वास्थ्य और जिंदगी से खिलवाड़ करने वाली एक बेहद चौंकाने वाली खबर मध्य प्रदेश से सामने आई है। सोचिए, जिन डॉक्टरों पर हम आंख बंद करके भरोसा करते हैं, अगर वही फर्जी डिग्रियों के सहारे सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज कर रहे हों, तो यह कितना डरावना है। दमोह पुलिस ने एक ऐसे ही बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है जो पैसों के बदले फर्जी एमबीबीएस (MBBS) की डिग्रियां और मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन बांट रहा था। आइए जानते हैं कि पुलिस ने इस पूरे खेल को कैसे उजागर किया। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे को हिलाकर रख देने वाले इस Fake Doctor Racket का मुख्य सरगना हीरा सिंह कौशल आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। दमोह पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे भोपाल के कोहेफिजा इलाके से गिरफ्तार किया है। दमोह के एसपी आनंद कलादगी ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संजीवनी क्लिनिकों में फर्जी डिग्रियों के दम पर नौकरी हासिल करने वाले फर्जी डॉक्टरों का यह नेटवर्क काफी बड़ा है। मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद इस रैकेट से जुड़े 50 से ज्यादा अन्य संदिग्ध डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें अलग-अलग जिलों में छापेमारी कर रही हैं।
असली रजिस्ट्रेशन नंबर चुराकर चल रहा था खेल
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब दमोह के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को एक गोपनीय शिकायत मिली। उन्होंने जब शक के आधार पर कुछ डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच करवाई, तो मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल की रिपोर्ट देखकर हर कोई दंग रह गया। जांच में पता चला कि आरोपी डॉक्टरों ने साल 2018 के एक असली रजिस्ट्रेशन नंबर में हेराफेरी करके उसे 2023 का बना लिया था। असल में वह रजिस्ट्रेशन नंबर नर्मदापुरम में तैनात एक असली डॉक्टर का था, जिसका इस्तेमाल ये फर्जी डॉक्टर सरकारी नौकरी पाने के लिए कर रहे थे।
लाखों रुपए में बिक रही थीं डिग्रियां
पुलिस की अब तक की पूछताछ में यह बात साफ हो चुकी है कि इस Fake Doctor Racket के जरिए 8 से 10 लाख रुपए लेकर MBBS की फर्जी डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का जाली रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया जाता था। इस मामले में पकड़े गए आरोपियों में से एक डॉक्टर के पास केवल बीडीएस (डेंटिस्ट) और दूसरे के पास बीएचएमएस (होम्योपैथी) की असली डिग्री थी, लेकिन एलोपैथिक डॉक्टर बनकर ज्यादा पैसे कमाने और सरकारी नौकरी पाने के लालच में इन्होंने लाखों रुपए देकर एमबीबीएस की फर्जी मार्कशीट खरीद ली।
सरकारी मिशन के तहत पा ली थी नियुक्ति
यह फर्जी डॉक्टर कोई निजी क्लिनिक नहीं चला रहे थे, बल्कि सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संजीवनी क्लिनिक और सरकारी आरोग्य केंद्रों में बकायदा तैनात थे। आरोपी पिछले कई महीनों से, और एक आरोपी तो पिछले ढाई साल से जबलपुर के एक अस्पताल में डॉक्टर के रूप में मरीजों का इलाज कर रहा था। मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी फर्जी डॉक्टरों की नियुक्तियों को तुरंत रद्द करने के लिए एनएचएम भोपाल को पत्र लिख दिया है।
पूरे जिले के डॉक्टरों के कागजात खंगालेगी पुलिस
इस हैरान करने वाले Fake Doctor Racket के सामने आने के बाद दमोह के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने अब जिले भर में तैनात सभी रेगुलर, एनएचएम और बॉन्ड वाले डॉक्टरों की डिग्रियों और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की कड़ाई से री-वेरिफिकेशन करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके तहत जिला अस्पताल और ब्लॉक स्तर पर काम कर रहे करीब 80 से ज्यादा डॉक्टरों के दस्तावेजों की दोबारा बारीकी से जांच की जाएगी ताकि व्यवस्था में छिपे ऐसे और भी धोखेबाजों को पकड़ा जा सके।







