ED Raid : सुरक्षा एजेंसियों ने देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले नेटवर्क के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में गुरुवार को टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ पर ED का एक्शन देखने को मिला। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुबह-सुबह एक साथ देश के 5 राज्यों में धावा बोला। पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र की कुल 13 जगहों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया गया। यह पूरी कार्रवाई कथित तौर पर देश विरोधी गतिविधियों के लिए पैसे जुटाने और गैर-कानूनी तरीके से सीमा पार कराने वाले संदिग्धों के ठिकानों पर की गई है।
सुबह-सुबह संदिग्धों के ठिकानों पर दी दस्तक
ईडी की टीमों ने उत्तर प्रदेश पुलिस और स्थानीय सुरक्षा बलों के साथ तालमेल बिठाकर इस छापेमारी को अंजाम दिया। जांच एजेंसी के लखनऊ जोनल ऑफिस ने इस पूरे ऑपरेशन की कमान संभाली और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्रवाई शुरू की।
सर्च ऑपरेशन के दौरान दिल्ली के मदनपुर खादर और बटला हाउस इलाके में टीमें पहुंचीं। वहीं, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, महाराष्ट्र के रायगढ़ और पश्चिम बंगाल के कोलकाता, मुर्शिदाबाद, नॉर्थ और साउथ 24 परगना जैसे संवेदनशील इलाकों में भी संदिग्ध ठिकानों की बारीकी से तलाशी ली गई।
कई चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थान जांच के दायरे में
जांच के दौरान ईडी के रडार पर कुछ चैरिटेबल संस्थाएं और स्कूल-कॉलेज भी आए हैं। दिल्ली के मदनपुर खादर में स्थित ‘सन शाइन हेल्थ एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी’ पर टीम ने दबिश दी। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना में ‘कबीरबाग मिल्लत एकेडमी’ और ‘हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम’ जैसी संस्थाओं के खातों और दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसी को शक है कि समाज सेवा की आड़ में इन जगहों का इस्तेमाल गलत गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
एटीएस की एफआईआर से खुला पूरा मामला
यह पूरा मनी लॉन्ड्रिंग मामला दरअसल उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (यूपी एटीएस) द्वारा दर्ज की गई एक पुरानी एफआईआर से जुड़ा है। यूपी एटीएस ने जांच में पाया था कि एक बहुत ही संगठित गिरोह भारत में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध रूप से सीमा पार कराने में मदद कर रहा है। ये लोग न सिर्फ घुसपैठ कराते थे, बल्कि उनके लिए फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य भारतीय दस्तावेज भी तैयार करते थे ताकि वे देश के अलग-अलग कोनों में आसानी से बस सकें।
विदेशी पैसे को ठिकाने लगाने का खेल
अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरे नेटवर्क को चलाने के लिए विदेशों से भारी मात्रा में चंदा (फंडिंग) मिल रहा था। इस पैसे को सीधे तौर पर इस्तेमाल करने के बजाय कई फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) और अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए घुमाया जाता था, ताकि कोई आसानी से पैसे के असली मालिक तक न पहुंच सके। साथ ही, संदिग्ध लोगों को कैश में भुगतान करने और छोटी-छोटी किश्तों में पैसे भेजने की बात भी सामने आई है। ईडी फिलहाल इन सभी बैंक खातों और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
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