Sanskriti Sansad 2026 : धर्म नगरी काशी से नई पीढ़ी के मार्गदर्शन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। तीन से पांच नवंबर तक वाराणसी में देशभर के साधु-संतों, विद्वानों और विचारकों का बड़ा समागम आयोजित हो रहा है। इस आयोजन का मुख्य ध्येय युवा पीढ़ी (Gen Z) के मानसिक भटकाव को दूर करना और उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा, ग्राम्य संस्कृति तथा राष्ट्रधर्म के भाव से जोड़ना है।
संस्कृति संसद 2026 जेन जी कान्क्लेव
गंगा महासभा के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय ‘संस्कृति संसद 2026’ में इस बार सबसे खास आकर्षण ‘जेन जी कान्क्लेव’ (Gen Z Conclave) रहने वाला है। सिगरा स्थित कैवल्य ज्ञान पीठ में आयोजित प्रेसवार्ता में अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने इस समागम के दूरगामी उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की।
युवाओं की शंकाओं का आध्यात्मिक व वैज्ञानिक समाधान
डिजिटल क्रांति और भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली के इस दौर में युवा अक्सर कई तरह के मानसिक द्वंद्व और भ्रम का सामना करते हैं। स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने स्पष्ट किया कि ‘जेन जी कान्क्लेव’ में लगभग 90 प्रतिशत सहभागिता युवाओं की ही होगी। इसमें संत और विद्वान युवा पीढ़ी से सीधा संवाद करेंगे और उनकी जिज्ञासाओं, तार्किक प्रश्नों तथा समकालीन शंकाओं का समाधान वैज्ञानिक व आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में देंगे। हार्दिक पटेल जैसे कई चर्चित युवा नेता भी इस मंच पर युवाओं से सीधा संवाद करेंगे।
परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल
आयोजन समिति का मानना है कि भारतीय संस्कृति केवल सहेजकर रखने की धरोहर नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक विज्ञान, ज्ञान और आज की पीढ़ी की दिनचर्या से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। इस कान्क्लेव के जरिए संतों का प्रयास रहेगा कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत पर गर्व महसूस हो और वे नव भारत के निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका समझ सकें।
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