UP Education Reform: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों (Government School) का जिक्र आते ही पहले लोगों के जेहन में टूटी दीवारें, बदहाल क्लासरूम और सुविधाओं की कमी जैसी तस्वीरें उभरती थीं। लेकिन पिछले कुछ सालों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जमीन पर एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य सरकार ने न सिर्फ स्कूलों की इमारतों को संवारा है, बल्कि वहां मिलने वाली शिक्षा के स्तर को भी काफी ऊपर उठाया है। आज यूपी के गांव-गांव में मौजूद सरकारी स्कूल निजी स्कूलों को टक्कर देते नजर आ रहे हैं। आइए समझते हैं कि राज्य के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने मिलकर इस व्यवस्था को कैसे बदला है।
ऑपरेशन कायाकल्प
प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के स्कूलों का हुलिया बदलने में सबसे बड़ी भूमिका इस विशेष अभियान ने निभाई है। इसके तहत अब तक राज्य के करीब 1.32 लाख परिषदीय स्कूलों का कायाकल्प किया जा चुका है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2017-18 में जहां केवल 36 फीसदी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं मौजूद थीं, वहीं आज यह आंकड़ा बढ़कर 96.30 फीसदी से ज्यादा हो चुका है।
अब इन स्कूलों में बच्चों को पीने का साफ पानी, साफ-सुथरे शौचालय, सुंदर पुस्तकालय और बैठने के लिए बेहतर डेस्क-बेंच मिल रहे हैं। इसके साथ ही, हजारों स्कूलों में स्मार्ट क्लास शुरू हो चुकी हैं। सिर्फ बुनियादी ढांचा ही नहीं, बल्कि साढ़े चार लाख से ज्यादा शिक्षकों को खास ट्रेनिंग भी दी गई है ताकि वे छोटे बच्चों को खेल-खेल में भाषा और गणित की बुनियादी बातें आसानी से सिखा सकें।
UP Education Reform: मॉडल और अभ्युदय विद्यालय
सरकार केवल पुराने स्कूलों को ठीक करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह भविष्य के हिसाब से आधुनिक स्कूलों का एक नया नेटवर्क भी तैयार कर रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के सभी 75 जिलों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय बनाने का काम चल रहा है, जिनमें से ज्यादातर के लिए जमीन का चुनाव भी पूरा हो चुका है। इसके साथ ही 75 मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय भी विकसित किए जा रहे हैं। बेटियों की पढ़ाई बीच में न छूटे, इसके लिए राज्य के 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को चरणबद्ध तरीके से इंटरमीडिएट यानी कक्षा 12 तक बढ़ाया जा रहा है। जिन इलाकों में ऐसे आवासीय स्कूल नहीं हैं, वहां नए स्कूल खोलने की भी तैयारी है।
इसके अलावा, माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के जरिए राजकीय और सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में आधुनिक संसाधनों का विस्तार किया गया है। नए सरकारी स्कूलों के निर्माण के साथ-साथ छात्र-छात्राओं के लिए सैकड़ों कंप्यूटर लैब (आईसीटी लैब) और स्मार्ट क्लासरूम बनाए गए हैं। साथ ही, केंद्र सरकार की मदद से चल रहे 1,722 पीएम श्री स्कूलों में नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों को हुनरमंद बनाने और नए तौर-तरीकों से सिखाने पर खास जोर दिया जा रहा है।
हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
इस पूरे बदलाव के पीछे सरकार का मकसद सिर्फ दीवारों पर नया रंग-रोगन करना या नई इमारतें खड़ी करना नहीं है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के मुताबिक, विभाग का असली उद्देश्य राज्य के प्रत्येक बच्चे को एक ऐसा माहौल देना है जहां वह आधुनिक और तकनीक से जुड़ी शिक्षा पा सके।
जब शिक्षकों को सही ट्रेनिंग मिलती है और बच्चों को डिजिटल माध्यम से सीखने के संसाधन मिलते हैं, तो पढ़ाई का पूरा माहौल अपने आप बदल जाता है। इन कोशिशों का सबसे बड़ा फायदा उन गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों को मिल रहा है, जो महंगे प्राइवेट स्कूलों की फीस नहीं भर सकते थे। अब वे भी अपने ही गांव के सरकारी स्कूल में बैठकर कंप्यूटर सीख रहे हैं और एक बेहतर भविष्य की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं।
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