BRICS LEMM Meeting Hyderabad 2026: दुनियाभर में काम करने के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। अब सिर्फ पारंपरिक नौकरियों का जमाना नहीं रहा, बल्कि गिग इकॉनमी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने रोजगार का पूरा ढांचा ही बदल दिया है। ऐसे बदलते दौर में कामगारों के अधिकारों, उनकी सामाजिक सुरक्षा और नए हुनर की जरूरत पर चर्चा करना बेहद जरूरी हो गया है। इसी सिलसिले में भारत एक बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने जा रहा है। हमारे देश के ऐतिहासिक शहर हैदराबाद में दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बड़े नेता और अधिकारी जुटने वाले हैं, ताकि रोजगार और श्रम से जुड़े बड़े मसलों पर मिलकर रणनीति बनाई जा सके।
BRICS LEMM Meeting Hyderabad 2026: ब्रिक्स देशों के श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक
भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत 15 और 16 जुलाई 2026 को हैदराबाद में ब्रिक्स देशों के श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक (LEMM) आयोजित होने जा रही है। इस बैठक की कमान केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री श्री मनसुख मांडविया संभालेंगे। इस बार भारत ने बैठक के लिए एक खास विषय चुना है, जो है ‘बिल्डिंग रिजीलंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड ससटेनेबिलिटी’। इसका सीधा सा मतलब यह है कि हमें एक ऐसा वर्क कल्चर तैयार करना है जो हर मुश्किल हालात का सामना कर सके, जिसमें नयापन हो और जो लंबे समय तक टिक सके। यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें लिए गए फैसले सीधे तौर पर करोड़ों कामगारों के भविष्य को प्रभावित करेंगे।
रोजगार कार्य समूह
मंत्रियों की इस बड़ी बैठक से ठीक पहले, यानी 13 और 14 जुलाई को इसी शहर में तीसरी ब्रिक्स रोजगार कार्य समूह की बैठक भी पूरी हो चुकी है। इस समूह ने मिलकर एक खास मसौदा तैयार किया है, जिसे अब अंतिम मंजूरी के लिए मंत्रियों के सामने रखा जाएगा। इस शुरुआती बातचीत का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि सभी सदस्य देशों ने अपने-अपने देशों के अच्छे अनुभवों और जमीनी हकीकतों को एक-दूसरे के साथ साझा किया। इससे यह समझने में मदद मिली कि अलग-अलग संस्कृतियों और अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार की चुनौतियों से कैसे निपटा जा रहा है।
सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा
इस पूरी चर्चा का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर टिका है कि कैसे हर कामकाजी व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जाएं। बैठक में सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने और असंगठित क्षेत्र के श्रम बाजार को औपचारिक रूप देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हमारे देश में आज भी एक बहुत बड़ा तबका ऐसा है जो बिना किसी फिक्स सैलरी या मेडिकल सिक्योरिटी के काम करता है। उन्हें मुख्यधारा में लाना इस योजना का मुख्य लक्ष्य है। इसके साथ ही, कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने और उनके लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने पर भी गंभीरता से बातचीत की जाएगी।
डिजिटल प्रौद्योगिकियों का लाभ
आज के समय में तकनीक से दूर रहकर विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। इसीलिए बैठक का एक मुख्य एजेंडा युवाओं के कौशल विकास और उनकी मैपिंग से जुड़ा है। इसके अलावा, जो लोग जोमैटो, स्विगी या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए डिलीवरी पार्टनर या फ्रीलांसर के रूप में काम करते हैं, उन्हें सुरक्षा देना बहुत जरूरी है। सरकार का मकसद इन गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के कल्याण के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाना है, ताकि तकनीक के इस दौर में कोई भी पीछे न छूटे। उम्मीद है कि हैदराबाद की यह बैठक ब्रिक्स देशों के कामगारों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य का रास्ता साफ करेगी।







