India-UK Ceta DCC trade agreement: भारत और ब्रिटेन के व्यावसायिक रिश्तों के इतिहास में एक नया पन्ना जुड़ गया है। दोनों देशों के बीच काफी समय से जिस बड़े कारोबारी समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी, वह आखिरकार जमीन पर उतर आया है। इस फैसले से न सिर्फ बड़े उद्योगों को फायदा होने वाला है, बल्कि ब्रिटेन में काम करने का सपना देखने वाले भारतीय युवाओं और वहां बिजनेस फैलाने की चाह रखने वाले छोटे व्यापारियों के लिए भी तरक्की के नए रास्ते खुल गए हैं। नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए वाणिज्य सचिव (Commerce Secretary) राजेश अग्रवाल ने इस पूरी डील को भारत के व्यापारिक इतिहास का एक बड़ा मील का पत्थर बताया है। आइए बेहद सरल भाषा में समझते हैं कि इस पूरे फैसले के मुख्य बिंदु क्या हैं।
India-UK Ceta DCC trade agreement: व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता
भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुआ यह खास समझौता अब आधिकारिक रूप से पूरी तरह लागू हो चुका है। यह डील दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और ज्यादा मजबूत करने के इरादे से तैयार की गई है। इस समझौते की सबसे खास बात यह है कि यह भारतीय निर्यातकों को ब्रिटिश बाजार में करीब 99 फीसदी टैरिफ लाइनों तक जीरो-ड्यूटी एक्सेस देता है।
इसका सीधा मतलब यह हुआ कि भारत से जाने वाले ज्यादातर सामानों पर अब ब्रिटेन में कोई अतिरिक्त टैक्स या सीमा शुल्क नहीं चुकाना होगा। वाणिज्य सचिव के मुताबिक, यह दो बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई एक मजबूत आर्थिक साझेदारी है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को एक बिल्कुल नए दौर में ले जाएगी।
डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन
व्यापार के अलावा, इस समझौते में नौकरीपेशा लोगों और खासतौर पर आईटी क्षेत्र के प्रोफेशनल्स का भी पूरा ख्याल रखा गया है। CETA के साथ ही सोशल सिक्योरिटी पर एक अहम एग्रीमेंट भी लागू हुआ है, जिसे तकनीकी भाषा में डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) कहा जाता है। इस नई व्यवस्था से उन भारतीय कर्मचारियों और उनकी कंपनियों को सीधा फायदा पहुंचेगा जो कुछ समय या शॉर्ट टर्म असाइनमेंट के लिए ब्रिटेन जाते हैं। अब इन योग्य कर्मचारियों को एक निश्चित समय के लिए ब्रिटेन में वहां का सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन (सामाजिक सुरक्षा अंशदान) देने से पूरी तरह छूट मिल जाएगी। इससे भारतीय प्रोफेशनल्स की मोबिलिटी बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता काफी मजबूत होगी।
इस एग्रीमेंट को आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, ताकि समाज के हर वर्ग तक इसका लाभ पहुंचे। इस बड़े आर्थिक फैसले का असर देश के छोटे उद्योगों (MSMEs), किसानों, मछुआरों और स्थानीय मैन्युफैक्चरर्स पर सकारात्मक रूप से दिखेगा। टैक्स खत्म होने से ब्रिटिश बाजारों में हमारे प्रोसेस्ड फूड, मरीन प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो कंपोनेंट्स, लेदर, जूते और कपड़ों की मांग काफी बढ़ जाएगी क्योंकि वहां अब ये सामान पहले से काफी सस्ते और कॉम्पिटिटिव हो जाएंगे।
इसके साथ ही, भारत ने इस समझौते को करते समय दूरदर्शिता दिखाई है और अपने घरेलू बाजारों की सुरक्षा का भी पूरा इंतजाम किया है। यही वजह है कि सरकार ने अपने सेंसिटिव सेक्टर्स को प्रोटेक्ट किया है, जिसके तहत डेयरी प्रोडक्ट्स, अनाज, बाजरा, खाने वाले तेल, तिलहन, सेब और कई तरह की सब्जियों को इस टैक्स छूट के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है ताकि हमारे स्थानीय किसानों के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे। कुल मिलाकर, यह व्यापार समझौता भारत को वैश्विक वैल्यू चेन में एक बेहद मजबूत स्थिति में खड़ा करने जा रहा है।







