India-UK CETA agreement : अगर आप भी महंगी विदेशी गाड़ियों या प्रीमियम स्कॉच व्हिस्की के शौकीन हैं, या फिर आपका कोई बिजनेस है जो ग्लोबल मार्केट में कदम जमाना चाहता है, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी और अच्छी खबर है। भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत आखिरकार एक बड़े फैसले में बदल गई है। दोनों देशों के बीच हुआ ऐतिहासिक व्यापार समझौता अब हकीकत बनने जा रहा है। यह एक ऐसा कदम है जिससे न सिर्फ बड़ी कंपनियों को फायदा होगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि इस पूरे मामले की हकीकत क्या है और इससे क्या-क्या बदलने वाला है।
India-UK CETA agreement: व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता
India-Britain के बीच का यह करार सिर्फ एक सामान्य व्यापारिक डील नहीं है, बल्कि इसे एक बेहद मजबूत कानूनी ढांचा दिया गया है। पिछले साल 25 जुलाई 2025 को दोनों देशों ने इस पर दस्तखत किए थे, और अब यह 15 जुलाई 2026 से पूरी तरह अमल में आ रहा है। इस डील की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लागू होते ही ब्रिटेन के बाजार में होने वाले 99 फीसदी भारतीय निर्यात पर से टैक्स पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
इसका सीधा मतलब यह हुआ कि भारतीय व्यापारियों के लिए ब्रिटेन में अपना सामान बेचना पहले के मुकाबले काफी आसान और मुनाफा देने वाला साबित होगा। वहीं, दूसरी तरफ भारत भी ब्रिटेन से आने वाले कई खास सामानों पर अपने टैक्स के नियमों में ढील दे रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार का एक नया संतुलन बनेगा।
कस्टम ड्यूटी में भारी कटौती
इस पूरे समझौते में जिस बात की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है आयात होने वाले सामानों पर लगने वाले टैक्स में होने वाली कमी। सरकार ने ऑटोमोबाइल सेक्टर के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। Britain से पूरी तरह से बनकर आने वाली कारों और भारी ट्रकों पर जो 110 फीसदी का भारी-भरकम टैक्स लगता था, उसे धीरे-धीरे घटाकर सिर्फ 10 फीसदी पर लाया जाएगा।
पेट्रोल और डीजल से चलने वाली कारों को तो यह राहत तुरंत मिल जाएगी, जिससे उनकी कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि, भारत ने अपने घरेलू उद्योगों का भी ख्याल रखा है। यही वजह है कि इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियों पर यह टैक्स छूट छठे साल से मिलनी शुरू होगी। इसके बदले में भारतीय इलेक्ट्रिक कारों को भी ब्रिटिश बाजार में प्राथमिकता मिलेगी।
गाड़ियों के अलावा प्रीमियम शराब के शौकीनों के लिए भी अच्छी खबर है। स्कॉच व्हिस्की, वोदका, जिन और टकीला जैसी विदेशी शराब पर लगने वाली ड्यूटी पहले ही साल में 150 फीसदी से घटकर 110 फीसदी हो जाएगी। आने वाले दस सालों में स्कॉच पर यह टैक्स घटकर महज 40 फीसदी रह जाएगा। हालांकि, यह छूट सिर्फ उन्हीं चुनिंदा और महंगे ब्रांड्स पर मिलेगी जो सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम कीमत की शर्तों को पूरा करेंगे।
यह भी पढ़ें: जम्मू कोर्ट ने जारी किया आतंकी हाफिज सईद के खिलाफ वारंट, अब भारत में चलेगा मुकदमा
ब्रिटिश बाजार में सीधी पहुंच
इस समझौते का एक और बेहद शानदार पहलू यह है कि इससे भारत के पारंपरिक और बड़े रोजगार देने वाले सेक्टर्स को बहुत मजबूती मिलेगी। भारत में बनने वाले कपड़े, जूते, टेक्सटाइल, प्रोसेस्ड फूड और हस्तशिल्प जैसे सामान अब बिना किसी सीमा शुल्क के सीधे ब्रिटेन के बाजारों में बिक सकेंगे। पहले इन सामानों पर 4 से 16 फीसदी तक का टैक्स देना पड़ता था, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सामान थोड़े महंगे हो जाते थे। अब टैक्स हटने से हमारे स्थानीय कारीगरों और एक्सपोर्टर्स को सीधे फायदा होगा।
इसके साथ ही, देश के आईटी सेक्टर और बड़ी कंपनियों जैसे टीसीएस और इन्फोसिस के लिए भी रास्ते आसान हुए हैं। ब्रिटेन में काम करने जाने वाले भारतीय कर्मचारियों के लिए अब कंपनियों को शुरुआती पांच सालों तक वहां का सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन नहीं देना होगा। इतना ही नहीं, भारतीय कंपनियां अब ब्रिटेन सरकार के लगभग 40,000 बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स की बोलियों में भी हिस्सा ले सकेंगी, जो देश के सर्विस सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है। कुल मिलाकर, यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए तैयार है।







