UP Board cancels recognition: उत्तर प्रदेश में स्कूल खोलने और उन्हें चलाने के नियमों को लेकर माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) अब काफी सख्त नजर आ रहा है। हाल ही में बोर्ड ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। अगर आप उत्तर प्रदेश के निवासी हैं या शिक्षा जगत से जुड़े हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि यूपी बोर्ड ने नियमों की अनदेखी करने वाले सैकड़ों स्कूलों पर कड़ा एक्शन लिया है।

UP Board की बड़ी कार्रवाई
अक्सर देखने में आता है कि बहुत से स्कूल कागजों पर तो दर्ज होते हैं, लेकिन जमीन पर वहां न तो पढ़ाई हो रही होती है और न ही छात्र मौजूद होते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए परिषद के सचिव भगवती सिंह की ओर से एक अहम आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत प्रदेश के कुल 465 स्व वित्तपोषित (सेल्फ फाइनेंस) विद्यालयों के खिलाफ एक्शन लिया गया है। यह UP Board की बड़ी कार्रवाई इसलिए मानी जा रही है क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में स्कूलों पर पहले शायद ही कभी ऐसा फैसला लिया गया हो।

UP Board 465 स्कूलों की मान्यता खत्म
UP Board की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रदेश के इन 465 स्कूलों ने तय मानकों और शर्तों का पालन नहीं किया। जांच में सामने आया कि पिछले दो शैक्षणिक सत्रों (सालों) से इन स्कूलों में न तो कोई क्लास चल रही थी और न ही कोई छात्र बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए पंजीकृत था। जब स्कूल में दो साल से एक भी विद्यार्थी ही नहीं था, तो बोर्ड ने नियमों के तहत यूपी बोर्ड 465 स्कूलों की मान्यता खत्म करने का फैसला कर लिया। इसका सीधा मतलब यह है कि अब ये स्कूल वैध नहीं माने जाएंगे।

माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश निर्णय
अब सवाल उठता है कि यह फैसला किस नियम के आधार पर लिया गया है? दरअसल, इण्टरमीडिएट शिक्षा अधिनियम-1921 के तहत बने नियमों के अध्याय-सात के विनियम-11 (ढ़) में साफ तौर पर यह प्रावधान है। इस नियम के अनुसार, यदि कोई हाईस्कूल या इंटरमीडिएट स्तर का नया मान्यता प्राप्त स्कूल लगातार दो सालों तक न तो कक्षाएं चलाता है और न ही उसका कोई छात्र परीक्षा में बैठता है, तो उसकी मान्यता अपने आप (स्वतः) समाप्त समझी जाएगी। हालांकि, बोर्ड ने साफ किया है कि यह नियम इंटर वनटाइम, अतिरिक्त वर्ग या किसी खास वैकल्पिक विषय की मान्यता पर लागू नहीं होगा।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि जहां माध्यमिक शिक्षा परिषद का मुख्यालय है, यानी प्रयागराज में, वहां भी करीब दो दर्जन स्कूलों पर गाज गिरी है। इसके अलावा आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, गोरखपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ और वाराणसी सहित राज्य के लगभग सभी बड़े जिलों के स्कूल इस सूची में शामिल हैं।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार लाने के लिए यूपी बोर्ड का यह कदम बेहद जरूरी था। कागजों पर चल रहे और बिना छात्रों के खाली पड़े स्कूलों पर लगाम कसना समय की मांग थी। इस फैसले से साफ संदेश जाता है कि सिर्फ स्कूल खोल लेना काफी नहीं है, बल्कि वहां नियमों के अनुसार बच्चों को शिक्षा देना भी अनिवार्य है।
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