Kota News : आजकल ट्रेन का सफर वैसे तो बेहद सुहाना होता है, लेकिन जब अचानक चलते सफर में कुछ गड़बड़ हो जाए, तो यात्रियों की सांसें अटक जाती हैं। कुछ ऐसा ही डर और घबराहट का माहौल गुरुवार की सुबह कोटा के पास देखने को मिला, जब एक चलती ट्रेन से अचानक धुआं उठने लगा। आइए जानते हैं कि पूरी घटना क्या थी और रेलवे प्रशासन ने इसे कैसे संभाला।
सफर के दौरान अचानक बदला माहौल
गुरुवार की सुबह करीब 9:20 बजे इंदौर से जोधपुर जा रही रणथंभौर एक्सप्रेस (12465) अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी। सब कुछ सामान्य चल रहा था कि तभी अचानक ट्रेन के आगे लगे जनरल कोच के पहियों के पास से गाढ़ा धुआं निकलने लगा। पहियों से धुआं उठता देख यात्रियों की जान हलक में आ गई। ट्रेन में बैठे लोगों के बीच तुरंत हड़कंप मच गया और किसी अनहोनी के डर से यात्री घबरा गए।
सूझबूझ से रोका गया बड़ा खतरा
जैसे ही पहियों से धुआं निकलने की बात सामने आई, रेलवे स्टाफ ने तुरंत मुस्तैदी दिखाई। एहतियात के तौर पर ट्रेन को लूनीरिछा स्टेशन पर इमरजेंसी ब्रेक लगाकर तुरंत रोक दिया गया। गाड़ी रुकते ही यात्रियों में अपनी जान बचाने की होड़ मच गई और कई लोग जल्दबाजी में कोच से नीचे कूदने लगे। हालांकि, रेलवे कर्मचारियों ने बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी, जिससे स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ गई।
आखिर क्यों निकला था पहियों से धुआं
रेलवे की तकनीकी टीम ने जब बारीकी से जांच की, तो पता चला कि यह कोई बड़ी आग नहीं थी, बल्कि ट्रेन के एक कोच का ब्रेक जाम हो गया था। ब्रेक जाम होने की वजह से पहिया और ब्रेक के बीच लगातार तेज घर्षण (friction) हो रहा था, जिसके कारण वहां से धुआं उठने लगा था। कर्मचारियों ने तुरंत ब्रेक को रिलीज किया, जिसके बाद धुआं निकलना बंद हो गया। इस तकनीकी खराबी को दूर करने और पूरी जांच करने के बाद ट्रेन को करीब 20 मिनट की देरी से आगे के लिए रवाना किया गया। इस दौरान पीछे आ रही बांद्रा-बरौनी अवध एक्सप्रेस को भी कुछ देर के लिए रोकना पड़ा।
बार-बार होने वाली घटनाओं से उठते सवाल
समय रहते खराबी का पता चलने से एक बड़ा हादसा तो टल गया, लेकिन इस रूट पर यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ समय में इस रेलखंड पर आग लगने और धुआं उठने के कई मामले सामने आ चुके हैं। बीते 17 मई को भी एक राजधानी ट्रेन में आग लगने की खबर आई थी, जिसकी जांच रिपोर्ट का अब तक इंतजार है। इसके अलावा हिंडौन और गंगापुर स्टेशनों के पास भी ऐसी ही घटनाएं देखने को मिली हैं। एक महीने के भीतर इस तरह के चार मामलों ने यात्रियों की चिंता और रेलवे की मेंटेनेंस व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
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