CM Yogi: उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में आए आंधी-तूफान और भीषण गर्मी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक मजबूत करने के लिए हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक की। शनिवार को राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के मौसम संबंधी ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (Early Warning System) को अधिक सटीक, त्वरित और जन-केंद्रित (People-centric) बनाया जाए।
CM Yogi ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान यदि समय रहते सटीक जानकारी जनता तक पहुंच जाए, तो कई अमूल्य जानों को बचाया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि मौसम का पूर्वानुमान केवल तकनीकी ढांचे तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के ‘अंतिम व्यक्ति’ तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।
‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ पर जोर: लाउडस्पीकर और FM से मिलेगी सूचना
ग्रामीण और संवेदनशील इलाकों में सूचना तंत्र को मजबूत करने के लिए सीएम योगी ने ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ (अंतिम छोर तक पहुंच) को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत मौसम की चेतावनी देने के लिए इन माध्यमों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा:
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आईवीआरएस (IVRS – वॉयस कॉल अलर्ट) और मोबाइल एसएमएस।
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ग्राम पंचायत स्तर पर लगे लाउडस्पीकर।
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स्थानीय एफएम रेडियो (FM Radio) और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म।
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ग्राउंड लेवल पर ग्राम प्रधान, लेखपाल, आशा (ASHA) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता।
CM Yogi ने बैठक में मौजूद अधिकारियों से कड़े लहजे में पूछा कि हालिया आपदाओं के दौरान संबंधित जिलाधिकारियों (DMs) ने चेतावनी मिलने के बाद धरातल पर क्या त्वरित कदम उठाए थे, इसकी विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।
13 मई के भीषण तूफान की हुई समीक्षा; ‘सचेत’ प्लेटफॉर्म ने समय पर किया था अलर्ट
बैठक के दौरान गत 13 मई 2026 को उत्तर प्रदेश में आए भीषण तूफान और चक्रवात की समीक्षा रिपोर्ट CM Yogi के समक्ष प्रस्तुत की गई:
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पहले से थी नजर: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ‘मल्टी-हजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ ने इस आपदा की मॉनिटरिंग घटना से 7 दिन पहले ही शुरू कर दी थी। पहले ‘येलो’, फिर ‘ऑरेंज’ और अंत में कई जिलों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया था।
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80 से 130 किमी/घंटा की रफ्तार: कई जिलों में हवा की गति 80 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक रिकॉर्ड की गई थी।
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सचेत ऐप से त्वरित संदेश: लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, फतेहपुर, भदोही, मिर्जापुर, रायबरेली और उन्नाव जैसे जिलों में 70-80 किमी/घंटे की रफ्तार वाले अंधड़ का ‘नाउकास्ट’ (तत्काल) अलर्ट जिला प्रशासनों, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (DDMAs) और ‘आपदा मित्रों’ को ‘सचेत’ (Sachet) प्लेटफॉर्म के जरिए कलर-कोडेड संदेशों के रूप में समय पर भेज दिया गया था।
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यूपी का नया सुरक्षा कवच: लग रहे हैं आधुनिक डॉपलर रडार और ऑटोमैटिक स्टेशन
बैठक में यह जानकारी दी गई कि उत्तर प्रदेश में मौसम की सटीक ट्रैकिंग के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का जाल बिछाया जा रहा है:
| उपकरण / सिस्टम (Infrastructure) | वर्तमान स्थिति और आगामी योजना (Current Status & Plans) |
| ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) | प्रदेश भर में अब तक 450 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। |
| ऑटोमैटिक रेन गेज (ARG) | बारिश की सटीक माप के लिए 2,000 ऑटोमैटिक रेन गेज स्टेशन काम कर रहे हैं। |
| डॉपलर वेदर रडार (Doppler Radar) | अलीगढ़, झांसी, लखनऊ, वाराणसी और आजमगढ़ में रडार स्थापना की प्रक्रिया अंतिम चरण में है; जबकि बरेली, देवरिया और प्रयागराज में नए रडार स्वीकृत किए गए हैं। |
| विंड प्रोफाइलर रडार | तेज हवाओं की गति मापने के लिए लखनऊ और प्रयागराज में विंड प्रोफाइलर रडार लगाए जा रहे हैं। |
कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर का होगा असेसमेंट
CM Yogi ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्थानीय स्तर पर उन पेड़ों, बिजली के पोलों, होर्डिंग्स और कमजोर अस्थायी ढांचों (Fragile Structures) का अग्रिम सर्वे करें जो तेज आंधी में गिरकर जनहानि का कारण बनते हैं। इसके आधार पर एक सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाए।
इसके साथ ही, यूएनडीपी (UNDP) के सहयोग से प्रदेश के 15 सरकारी विभागों, सभी 75 जिलों और 20 प्रमुख शहरों के लिए ‘आपदा प्रबंधन योजना’ तैयार की जा रही है। नाव दुर्घटनाओं को रोकने के लिए राज्य के 38 जिलों में 66,077 लाइफ जैकेट वितरित किए जा चुके हैं और अग्रिम मोर्चे पर तैनात ‘आपदा मित्र’ स्वयंसेवकों को सरकार की तरफ से बीमा प्रमाणपत्र भी सौंपे गए हैं।







