पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक ऐतिहासिक और बेहद चौंकाने वाली बगावत सामने आई है। पार्टी की वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में टीएमसी के 19 लोकसभा सांसदों ने एक अलग गुट बनाने का फैसला किया है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि साल 2024 के लोकसभा चुनावों में टीएमसी ने बंगाल की 42 सीटों में से 29 पर बंपर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा को 12 और कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली थी। चुनावों के बाद बशीरहाट से सांसद हाजी नुरुल इस्लाम के निधन के बाद पार्टी के कुल सांसदों की संख्या 28 रह गई थी। अब इस बगावत ने टीएमसी के संसदीय ढांचे को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है।

TMC बागी सांसद: कौन-कौन शामिल है इस गुट में?
काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई वाले इस बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर को पत्र सौंपकर एनडीए (NDA) को समर्थन देने और अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 19 प्रमुख सांसदों के नाम अब सार्वजनिक हो चुके हैं, जिनमें कई दिग्गज और सेलिब्रिटी चेहरे शामिल हैं:
-
शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल)
-
काकोली घोष दस्तीदार (बारासात)
-
यूसुफ पठान (बहरामपुर)
-
रचना बनर्जी (हुगली – ‘दीदी नंबर-1’ फेम अभिनेत्री)
-
शताब्दी रॉय (बीरभूम)
-
दीपक अधिकारी यानी देव (घाटल)
-
सायोनी घोष (जादवपुर)
-
जून मालिया (मेदिनीपुर)
-
जगदीश चंद्र बसुनिया (कूच बिहार)
-
खलीउर रहमान (जंगीपुर)
-
अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद)
-
पार्थ भौमिक (बैरकपुर)
-
बापी हलधर (मथुरापुर)
-
माला रॉय (कोलकाता साउथ)
-
मिताली बाग (आरामबाग)
-
कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम)
-
अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा)
-
डॉ. शर्मिला सरकार (वर्धमान ईस्ट)
-
असित कुमार मल्ल (बोलपुर)
इस लिस्ट में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम सायोनी घोष का माना जा रहा है, जिन्होंने कुछ समय पहले तक ममता बनर्जी को 2029 के प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश किया था।

Mamata Banerjee को झटका: दीदी के पास अब क्या बचा?
इस बड़ी बगावत के बाद ममता बनर्जी के खेमे में वफादार सांसदों की संख्या अब सिंगल डिजिट (एकल अंक) में सिमट कर रह गई है। लोकसभा में कुल 28 सांसदों में से 19 सांसदों के अलग होने के बाद ममता बनर्जी के पास अब संभावित रूप से केवल 9 सांसद ही बचे हैं।
ममता बनर्जी के पाले में बचे संभावित सांसदों की सूची इस प्रकार है:
-
अभिषेक बनर्जी, सुदीप बंधोपाध्याय, कल्याण बनर्जी, सौगात राय, महुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद, प्रसून बनर्जी, प्रतिमा मोंडल और सजदा अहमद।
लोकसभा के अलावा राज्यसभा में भी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। टीएमसी के दो वरिष्ठ राज्यसभा सांसदों—सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव—ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है और सियासी गलियारों में चर्चा है कि दोनों जल्द ही भाजपा के टिकट पर राज्यसभा जा सकते हैं। इसके बाद राज्यसभा में भी टीएमसी की ताकत 13 से घटकर 11 रह गई है।
बंगाल में कितनी बची है TMC की राजनैतिक ताकत?
TMC के लिए यह संकट सिर्फ दिल्ली (संसद) तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाल विधानसभा में भी पार्टी बड़े विभाजन से गुजर रही है। ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में टीएमसी के 58 विधायकों ने पहले ही विधानसभा में एक अलग गुट बना लिया था, और अब उनका दावा है कि इस बागी गुट को कुल 64 विधायकों का समर्थन हासिल हो चुका है।
विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त और अब विधानसभा से लेकर लोकसभा तक हुए इस दो-तिहाई विभाजन (Two-Third Split) के कारण ममता बनर्जी राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर बेहद कमजोर स्थिति में नजर आ रही हैं। एंटी-डिफेक्शन लॉ (दलबदल कानून) से बचने के लिए बागी गुट के पास जरूरी दो-तिहाई संख्या मौजूद है, जिससे वे असली टीएमसी और उसके सिंबल पर भी अपना दावा ठोक सकते हैं।
टीएमसी के 28 साल के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी बगावत है। काकोली घोष दस्तीदार गुट का कहना है कि वे बंगाल के विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एनडीए के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। इस अभूतपूर्व राजनीतिक संकट ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां ममता बनर्जी के लिए अपने बचे हुए कुनबे को संभालना और अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाना एक बेहद कठिन चुनौती बन गया है।
