Gurugram से कानून व्यवस्था को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। गुरुग्राम पुलिस ने शहर के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले विदेशी नागरिकों के दस्तावेजों की जांच के लिए एक विशेष अभियान चलाया था। इस जांच अभियान के दौरान पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के कान भी खड़े हो गए हैं। पुलिस ने शहर के विभिन्न हिस्सों से कई ऐसे विदेशी नागरिकों को पकड़ा है जो बिना किसी वैध दस्तावेज के काफी समय से यहां चोरी-छिपे रह रहे थे।
बॉर्डर पार कर भारत में ली थी एंट्री
पकड़े गए लोगों से जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो सुरक्षा को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। ये सभी नागरिक करीब एक साल पहले भारत-बांग्लादेश के कालियागंज बॉर्डर से एक स्थानीय एजेंट की मदद लेकर अवैध रूप से देश की सीमा में दाखिल हुए थे।
बॉर्डर पार करने के बाद ये सीधे दिल्ली आने वाली ट्रेन में बैठ गए और वहां से काम की तलाश में गुरुग्राम पहुंच गए। पिछले एक साल से ये लोग पुलिस और स्थानीय प्रशासन की नजरों से बचकर सोहना, ट्यूलिप चौक, सेक्टर-70, नखड़ौला और मानेसर जैसी जगहों पर रह रहे थे। ये सभी मुख्य रूप से ढाका के आसपास के इलाकों के रहने वाले हैं।
जांच के दौरान मिले बांग्लादेशी पहचान पत्र
क्राइम ब्रांच की टीम ने जब निर्माणाधीन साइटों और झुग्गियों में रहने वाले संदिग्ध लोगों के कागजातों को चेक किया, तो इन 13 लोगों के पास भारत का कोई भी वैध दस्तावेज या आईडी प्रूफ नहीं मिला। तलाशी लेने पर पुलिस को इनके पास से मूल बांग्लादेशी पहचान पत्र बरामद हुए।
पूछताछ में पता चला कि ये सभी लोग यहां दिहाड़ी मजदूर और श्रमिक का भेष बनाकर रह रहे थे ताकि किसी को कोई शक न हो। ये लोग अलग-अलग कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करके हर महीने 18 से 20 हजार रुपये तक कमा लेते थे। इस कमाई को ये लोग कुछ स्थानीय दलालों के जरिए ऑनलाइन माध्यम से बांग्लादेश में अपने परिवारों को भेजते थे।
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अब डिपोर्ट करने की तैयारी में प्रशासन
पकड़े गए सभी आरोपियों की उम्र 18 से 40 साल के बीच बताई जा रही है। गुरुग्राम पुलिस ने इन सभी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कागजी और कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही इन सभी नागरिकों को वापस उनके देश डिपोर्ट करने की तैयारी की जा रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह मामला काफी गंभीर है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस का कहना है कि बाहरी लोगों का इस तरह बिना पहचान के रहना शहर की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। यही वजह है कि पुलिस अब ऐसे संवेदनशील इलाकों और किराएदारों के वेरिफिकेशन के काम को और ज्यादा तेज करने जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की चूक न हो सके।

