PM Modi record: भारतीय राजनीति के इतिहास में 10 जून, 2026 का दिन एक बेहद खास और ऐतिहासिक तारीख के रूप में दर्ज हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित शासनाध्यक्ष (Head of Government) बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस खास मौके पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक विशेष प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी और उनके इस सफर को भारतीय लोकतंत्र की जीत बताया।
आइए सीधे और सरल शब्दों में समझते हैं कि यह रिकॉर्ड क्या है, मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में किन बड़ी बातों का जिक्र किया गया है, और पिछले 12 वर्षों में देश में क्या बड़े बदलाव आए हैं।

नेहरू जी से आगे निकले PM Modi: क्या है यह रिकॉर्ड?
अक्सर जब हम सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने की बात करते हैं, तो हमारे जेहन में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का नाम आता है। लेकिन यहाँ एक तकनीकी और लोकतांत्रिक अंतर को समझना जरूरी है। पंडित नेहरू साल 1947 में आजादी के बाद देश के अंतरिम प्रधानमंत्री बने थे, जबकि देश में पहला आम चुनाव 1952 में हुआ था।
अगर हम ‘निर्वाचित प्रधानमंत्री’ (Elected Prime Minister) के रूप में लगातार सेवा करने के दिनों को गिनें, तो नया रिकॉर्ड इस प्रकार है:
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पंडित जवाहरलाल नेहरू: साल 1952 से 1964 तक लगातार 4,398 दिन निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: 10 जून 2026 तक लगातार 4,399 दिन पूरे कर इस रिकॉर्ड को पार कर चुके हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपने प्रस्ताव में साफ कहा कि यह सिर्फ दिनों की गिनती नहीं है, बल्कि यह देश की जनता के अटूट विश्वास, लोकतांत्रिक चेतना और जनभागीदारी का प्रतीक है। इसके साथ ही, एनडीए सरकार के नेतृत्व में उनके 12 वर्ष भी पूरे हो गए हैं और वे सरकार के प्रमुख के तौर पर (गुजरात के मुख्यमंत्री के कार्यकाल को मिलाकर) लगातार 25 वर्षों की सेवा के एक बहुत बड़े ऐतिहासिक पड़ाव के बेहद करीब पहुंच रहे हैं। करीब छह दशकों के बाद देश ने किसी सरकार को लगातार तीसरी बार चुनकर देश की राजनीतिक स्थिरता पर मुहर लगाई है।

‘प्रधान सेवक’ का मंत्र और गरीबों का कल्याण
साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने थे, तब उन्होंने खुद को ‘प्रधानमंत्री’ नहीं बल्कि ‘प्रधान सेवक’ कहा था और ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा दिया था। मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में इस बात की सराहना की गई है कि पिछले 12 वर्षों में शासन के केंद्र में हमेशा गरीब और वंचित वर्ग रहे हैं।
इस दौरान जमीन पर जो बड़े बदलाव आए, उन्हें कुछ प्रमुख आंकड़ों से समझा जा सकता है:
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गरीबी से मुक्ति: सरकार के सामूहिक प्रयासों और योजनाओं की वजह से देश के 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आने में सफल रहे।
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बुनियादी सुविधाएं: करोड़ों परिवारों को पक्के मकान, बिजली का कनेक्शन और स्वच्छ पीने का पानी मिला।
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राशन और इलाज: देश के 80 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त राशन और 60 करोड़ से अधिक जरूरतमंदों को आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है।
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डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): सरकारी योजनाओं का पैसा अब बिना किसी बिचौलिए के सीधे गरीबों के बैंक खातों में पहुंच रहा है, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है।

युवा, महिला और किसानों का सशक्तिकरण
मंत्रिमंडल के इस प्रस्ताव में समाज के तीन सबसे बड़े स्तंभों—युवा, महिला और किसान—के जीवन में आए बदलावों का भी विस्तृत ब्योरा दिया गया है।
युवा शक्ति और विज्ञान
आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। चंद्रयान मिशन की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में एक वैश्विक महाशक्ति है। युवाओं को सिर्फ नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाने के लिए कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है।
महिला नेतृत्व में विकास
अब बात सिर्फ महिलाओं के विकास की नहीं, बल्कि महिलाओं के नेतृत्व में देश के विकास की हो रही है। ग्रामीण इलाकों में ‘धुआं मुक्त रसोई’ (उज्ज्वला योजना) और ‘लखपति दीदी’ अभियान ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। वहीं, संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का ऐतिहासिक कानून पास होना इस दशक का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है।







