11th Governing Council Meeting of NITI Aayog: दिल्ली में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक शुरू हो चुकी है। इस बैठक में देश के विकास को लेकर बड़े फैसले होने की उम्मीद है। बैठक की खास बात यह है कि इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और केंद्रीय मंत्री एक छत के नीचे जुटे हैं। चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि इस बार की बैठक में क्या खास है और देश के आम नागरिक के लिए इसके क्या मायने हैं।

बैठक का मुख्य एजेंडा और नए चेहरे
इस बार की नीति आयोग बैठक 2047 के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। बैठक में देश के विकास से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इनमें मुख्य रूप से रोजगार, कौशल विकास, स्वास्थ्य, पोषण और डिजिटल गवर्नेंस जैसे विषय शामिल हैं। इसके साथ ही, पिछले साल दिसंबर 2025 में हुए मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की सिफारिशों को जमीन पर उतारने की रणनीति भी बनाई जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक में कुछ राज्यों के नए मुख्यमंत्री पहली बार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। कर्नाटक के डीके शिवकुमार, तमिलनाडु के विजय और केरल के वी.डी. सतीशन जैसे गैर-भाजपा और गैर-एनडीए शासित राज्यों के नेता इस बार चर्चा का हिस्सा बने हैं। कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तो प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए साफ कहा था कि वे सहकारी संघवाद की भावना के साथ केंद्र के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। यह रुख उनके पूर्ववर्ती सिद्धारमैया से काफी अलग है, जिन्होंने पिछली बैठकों का बहिष्कार किया था।

इस साल की खास थीम और भविष्य का रोडमैप
हर साल इस बैठक की एक खास थीम होती है, और इस बार का पूरा फोकस समावेशी मानव विकास पर रखा गया है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि विकास का फायदा देश के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। सरकार चाहती है कि चाहे कोई किसी भी उम्र, क्षेत्र, लिंग या सामाजिक-आर्थिक बैकग्राउंड से हो, उसे आगे बढ़ने के बराबर मौके मिलें।
चूंकि भारत साल 2047 में अपनी आजादी के 100 साल पूरे करने जा रहा है, इसलिए केंद्र सरकार ने विकसित भारत लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस लक्ष्य को केवल जीडीपी (GDP) बढ़ाकर हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए देश की मानव पूंजी यानी इंसानी ताकत को मजबूत करना होगा। युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करना, महिलाओं और वंचित वर्गों को समान अवसर देना और राज्यों के बीच की आर्थिक असमानता को कम करना इस योजना का सबसे बड़ा हिस्सा है। यही वजह है कि इस बैठक में शिक्षा और सामाजिक समानता पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
नीति आयोग की यह बैठक सिर्फ कागजी योजनाओं के लिए नहीं है, बल्कि यह केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का एक बड़ा जरिया है। जब राज्यों का अपना विजन देश के राष्ट्रीय विजन से जुड़ेगा, तभी ‘विकसित भारत’ का सपना सच हो पाएगा। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन जब बात देश के विकास और हर नागरिक तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की आती है, तो सभी मुख्यमंत्रियों और नेताओं का एक साथ बैठना देश के लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। देखने वाली बात यह होगी कि इस महामंथन से निकले फैसले जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी असर दिखाते हैं।
