ET Global Leaders Forum : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ET Global Leaders Forum में देश और दुनिया के बड़े लीडर्स को संबोधित किया। अपने इस भाषण में पीएम मोदी ने भारत के तेजी से बढ़ते कदम, आर्थिक मजबूती और भविष्य की योजनाओं पर बहुत ही सरल और स्पष्ट तरीके से अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि जब पूरी दुनिया विकास को लेकर कई तरह की चिंताओं से जूझ रही है, तब भारत विकास का एक चमकता हुआ केंद्र बनकर उभर रहा है।
भारत में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों में निरंतरता
पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि आज भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी राजनीतिक स्थिरता और नीतियों में निरंतरता (continuity in policies) है। दुनिया के कई हिस्सों में संसाधनों को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे विकास की रफ्तार धीमी पड़ रही है। लेकिन भारत एक ऐसा देश है जो बिना रुके और बिना थके आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की विकास यात्रा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर सेक्टर को साथ लेकर चलने वाला एक बड़ा विजन है।
पीएम मोदी ने 15 अगस्त को 7 सेक्टर्स पर बात की
अपने भाषण में पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए गए अपने भाषण का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि भारत आज उन सात प्रमुख सेक्टर्स पर बहुत ज्यादा फोकस कर रहा है, जो देश के भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बनाएंगे। इन सेक्टर्स को उन्होंने ‘सप्त धाराएं’ कहा है।
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मैन्युफैक्चरिंग पावर: मेक इन इंडिया को नई ऊंचाइयों पर ले जाना।
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कृषि और फूड प्रोसेसिंग: किसानों की आय बढ़ाना और नए तरीके अपनाना।
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तकनीक और इनोवेशन: टेक्नोलॉजी के मामले में दुनिया का नेतृत्व करना।
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ग्रीन इकोनॉमी: पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना।
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ब्लू इकोनॉमी: समुद्री संसाधनों का सही और सुरक्षित इस्तेमाल करना।
इन सात सेक्टर्स पर ध्यान देकर भारत पॉलिसी लेवल पर नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स (सुधार) कर रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
रिफॉर्म हमारे लिए कम्पल्शन नहीं, हमारा कन्विक्शन है: नरेंद्र मोदी
रिफॉर्म्स यानी आर्थिक सुधारों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने एक बहुत ही गहरी बात कही। उन्होंने कहा, “रिफॉर्म हमारे लिए कोई मजबूरी (कम्पल्शन) नहीं है, बल्कि यह हमारा कमिटमेंट और कन्विक्शन है।”
उन्होंने 2014 से पहले और बाद के दौर का फर्क समझाने के लिए दो शब्दों का इस्तेमाल किया – PLP और PLI।
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PLP (Production Linked Punishment): पहले एक ऐसा दौर था जब कोई कंपनी अपनी तय सीमा से ज्यादा उत्पादन कर लेती थी, तो उसे सजा (नोटिस) दी जाती थी। इस डर से कंपनियां अपना ही सामान नष्ट कर देती थीं ताकि बाजार में सामान की किल्लत बनी रहे।
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PLI (Production Linked Incentive): आज हमारी सरकार ज्यादा प्रोडक्शन करने वाली कंपनियों को सजा नहीं, बल्कि इंसेंटिव (प्रोत्साहन) देती है ताकि देश में रोजगार बढ़े और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिले।
देश में इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा के क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने भारतीय रेलवे का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सरकार ने मिशन मोड में काम करते हुए देश भर के 6,500 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की आधुनिक व्यवस्था लागू की है।
इससे इंसानी गलतियों (human errors) से होने वाले हादसों पर रोक लगी है। साथ ही अनमैन्ड क्रॉसिंग को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जिससे ट्रेन दुर्घटनाओं के मामलों में 90 प्रतिशत तक की कमी आई है। पहले जहां एक साल में करीब 150 रेल हादसे होते थे, अब यह आंकड़ा घटकर 12 से 15 तक आ गया है।
रेगुलेशन की फिलॉसफी में बड़ा बदलाव
पीएम मोदी ने बताया कि 21वीं सदी के भारत में सरकार सिर्फ नियमों को बदल नहीं रही है, बल्कि नियमों को देखने के पूरे नजरिए को बदल रही है। पहले देश में “Prohibited unless permitted” (जब तक अनुमति न मिले, मना है) की सोच काम करती थी। लेकिन अब सरकार इसे बदलकर “Permitted unless prohibited” (जब तक मना न हो, अनुमति है) की दिशा में ले जा रही है। इससे देश में बिजनेस करना और आम लोगों का जीवन आसान (Ease of Living) हो रहा है।







