Sugar Price : घरेलू मांग पूरी करने के लिए देश में चीनी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध : सरकार | DD News UP

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Sugar Price : अगर आप भी बाजार में चीनी खरीदते समय बढ़ते दामों से परेशान हैं, तो आपके लिए एक जरूरी खबर है। हाल ही में चीनी की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिली है। पिछले महीने जो चीनी 48 रुपये किलो मिल रही थी, वह अब बढ़कर करीब 55 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसे देखते हुए सरकार हरकत में आ गई है। सरकार ने साफ किया है कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार (स्टॉक) मौजूद है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय इस पूरी स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है। आखिर कीमतें क्यों बढ़ीं, इसके पीछे सरकार ने कुछ मुख्य कारण बताए हैं:

  • उत्पादन में कमी: इस साल गन्ने की फसल को मौसम की वजह से नुकसान हुआ है। इसलिए चीनी का उत्पादन अनुमान से कम (करीब 306 लाख टन) रहने की उम्मीद है, जबकि शुरुआत में 343 लाख टन का अनुमान था।

  • त्योहारी सीजन की मांग: आने वाले त्योहारों की वजह से बाजार में चीनी की मांग अचानक बढ़ गई है।

  • जमाखोरी और सट्टेबाजी: कुछ व्यापारी और मिलें ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में चीनी स्टॉक करके रख रहे हैं (जमाखोरी कर रहे हैं), जिससे बाजार में आर्टिफीशियल किल्लत पैदा हो रही है।

  • ग्लोबल मार्केट: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चीनी की उपलब्धता कम हुई है, जिसका असर घरेलू बाजार पर पड़ा है।

क्या इथेनॉल की वजह से चीनी महंगी हुई?

कई लोग मान रहे थे कि पेट्रोल में मिलाने वाले इथेनॉल (Ethanol) को बनाने में ज्यादा चीनी का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे खाने वाली चीनी कम पड़ गई है। लेकिन सरकार ने इस बात को सिरे से नकार दिया है।

मंत्रालय के मुताबिक, इथेनॉल बनाने में चीनी का इस्तेमाल घटा है। साल 2022-23 में 12% चीनी इथेनॉल के लिए जाती थी, जो अब 2025-26 में घटकर सिर्फ 9% रह गई है। आजकल इथेनॉल का बड़ा हिस्सा अनाज (खासकर मक्का) से तैयार किया जा रहा है। इसलिए दाम बढ़ने के पीछे इथेनॉल को दोष देना सही नहीं है।

कीमतें रोकने के लिए सरकार के कदम

आम जनता को राहत देने और कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकार ने कुछ सख्त नियम लागू किए हैं:

  • स्टॉक लिमिट तय की: 1 अगस्त से 30 नवंबर तक कोई भी चीनी डीलर 400 टन से ज्यादा चीनी अपने पास स्टॉक करके नहीं रख सकता।

  • थोक खरीदारों पर लगाम: 1 सितंबर से थोक उपभोक्ता (जैसे बड़ी कंपनियां) 15 दिन की खपत से ज्यादा का भंडार नहीं रख सकेंगी।

कुल मिलाकर बात यह है कि सरकार के पास देश की जरूरत पूरी करने भर की चीनी मौजूद है। दाम बढ़ने का मुख्य कारण कुछ लोगों की जमाखोरी और त्योहारों की एक्स्ट्रा डिमांड है। सरकार के इन नए नियमों से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में चीनी की कीमतें कंट्रोल में आ जाएंगी और आम आदमी को राहत मिलेगी।

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