India-France के बीच हुए 13 अहम समझौते: फ्रांस के नीस शहर से भारत के द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर आई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति Emmanuel Macron के साथ रविवार को एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में प्रधानमंत्री के साथ भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी शामिल रहे। दोनों नेताओं की इस मुलाकात के दौरान India-France के बीच सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। दोनों देशों ने आपसी रणनीतिक साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाते हुए कुल 13 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो आने वाले समय में रक्षा से लेकर डिजिटल तकनीक तक की दिशा बदल देंगे।

India-France के बीच हुए 13 अहम समझौते
विदेश मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान रक्षा, व्यापार, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी, स्पेस और उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर बहुत बारीकी से चर्चा की गई। दोनों देशों ने यह फैसला किया है कि अगले 5 वर्षों के भीतर आपसी द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 16 अरब अमेरिकी डॉलर से दोगुना किया जाएगा। इसके लिए एक हाई-लेवल मैकेनिज्म और ‘इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग’ की आधिकारिक शुरुआत की गई है।
इस ऐतिहासिक बैठक के दौरान जिन 13 महत्वपूर्ण समझौतों और रोडमैप पर सहमति बनी है, उनकी पूरी सूची नीचे दी गई है:
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India-France इनोवेशन रोडमैप 2030: टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रिसर्च और शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को दिशा देने के लिए इस खास विजन को अपनाया गया है।
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संयुक्त भारत-फ्रांस AI वर्किंग ग्रुप: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित गवर्नेंस और जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए इस समर्पित ग्रुप का गठन किया गया है।
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कानपुर में नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: एयरोनॉटिक्स और विमानन से जुड़े क्षेत्रों में युवाओं को स्किल्ड बनाने के लिए NSTI कानपुर में इसकी स्थापना की जाएगी।
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UPI का विस्तार: डिजिटल पेमेंट सहयोग को मजबूत करने के लिए अब फ्रांस में भी भारत के ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (UPI) के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाया जाएगा।
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भारतीय स्टार्टअप्स को बढ़ावा: फ्रांस के मशहूर स्टार्टअप कैंपस ‘स्टेशन F’ में 10 और भारतीय होनहार स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट (शुरुआती मदद) किया जाएगा।
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सेंटर ऑफ डिजिटल साइंसेज: भारत के साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग (DST) और फ्रांस के ‘INRIA’ के बीच मिलकर इस डिजिटल सेंटर की स्थापना की जाएगी।
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ICCR इंडिया चेयर की स्थापना: शैक्षणिक सहयोग को और गहरा करने के लिए फ्रांस की ‘यूनिवर्सिटी पेरिस-सैकले’ में “AI, इनोवेशन और कल्चर” पर एक विशेष चेयर स्थापित होगी।
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डिजिटल हेल्थ रिसर्च: चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और फ्रांस के ‘हेल्थ डेटा हब’ के बीच एक ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ साइन हुआ है।
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द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना: अगले पांच सालों में आपसी व्यापार की मात्रा को तेजी से बढ़ाने के लिए एक उच्च स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है।
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इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग: अहम क्षेत्रों में सुरक्षित सप्लाई चेन सुनिश्चित करने के लिए इस नए डायलॉग मैकेनिज्म की शुरुआत हुई है।
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रेलवे विकास पर समझौता: भारत में अत्याधुनिक रेलवे और हाई-स्पीड रेल के विकास को गति देने के लिए दोनों देशों के बीच ‘डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट’ साझा किया गया।
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जनरल सिक्योरिटी एग्रीमेंट: दोनों देशों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए खुफिया और गोपनीय जानकारी के सुरक्षित आदान-प्रदान पर यह समझौता हुआ है।
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स्पेस रिसर्च में साझेदारी: अंतरिक्ष अन्वेषण और माइक्रोग्रैविटी रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी ‘CNES’ के बीच सहयोग पत्र पर दस्तखत किए गए।
द्विपक्षीय बैठक से पहले दोनों वैश्विक नेताओं ने ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम का भी शानदार उद्घाटन किया, जिसमें दोनों देशों के कई उभरते स्टार्टअप्स और वेंचर कैपिटल फंड्स ने अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया।
इस व्यस्त कार्यक्रम के खत्म होने के बाद राष्ट्रपति मैक्रों अपने खास मेहमान प्रधानमंत्री मोदी को नीस के करीब स्थित बेहद खूबसूरत ‘विला केरीलोस’ घुमाने ले गए, जो फ्रांस की प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का एक अद्भुत हिस्सा है। वहां की खूबसूरत वादियों में राष्ट्रपति मैक्रों ने पीएम मोदी के साथ एक बेहतरीन सेल्फी भी ली, जिसे उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया।

G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं?
अब जब फ्रांस इस समय वैश्विक राजनीति का केंद्र बना हुआ है, तो हमारे लिए यह समझना भी जरूरी है कि आखिर G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं। G7 का सीधा मतलब है ‘ग्रुप ऑफ सेवन’। यह दुनिया के सात सबसे अमीर, विकसित और आधुनिक अर्थव्यवस्था वाले देशों का एक अनौपचारिक मंच है। इस खास ग्रुप में संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन), जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी जैसे देश शामिल हैं।
इस समूह की ऐतिहासिक यात्रा भी बेहद दिलचस्प रही है। इसकी शुरुआत साल 1975 में छह देशों के साथ हुई थी, तब इसे G6 के नाम से जाना जाता था। इसके अगले ही साल यानी 1976 में जब कनाडा इस ग्रुप में शामिल हुआ, तो इसका नाम बदलकर G7 कर दिया गया।

समय के साथ वैश्विक राजनीति बदली और साल 1998 में इसमें रूस को एंट्री दी गई, जिससे यह मंच G8 बन गया। लेकिन साल 2014 में जब रूस ने यूक्रेन के क्रीमिया इलाके पर अपना सैन्य कब्जा कर लिया, तो अन्य सात देशों ने कड़ा रुख अपनाते हुए रूस को इस ग्रुप से सस्पेंड कर दिया। तब से यह मंच एक बार फिर अपने पुराने स्वरूप यानी G7 के रूप में काम कर रहा है।
