Bulandshahar: समंदर में मौत को मात देकर सुरक्षित लौटा Khurja का मर्चेंट नेवी कर्मी Sunny Chaudhary; भारतीय दूतावास ने ऐसे बचाई 20 जांबाजों की जान। DD News UP

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Bulandshahar: उत्तर प्रदेश के Bulandshahar जिले के खुर्जा से एक ऐसी खबर आई है, जिसे सुनकर हर किसी की सांसें थम गईं और फिर राहत की सांस ली गई। खुर्जा के रहने वाले 23 वर्षीय मर्चेंट नेवी कर्मी सनी चौधरी ओमान की खाड़ी में हुए एक भीषण मिसाइल हमले के बीच से मौत को मात देकर सकुशल अपने घर लौट आए हैं। समंदर के बीचों-बीच जब मौत सामने खड़ी थी, तब भारत सरकार और ओमान की नौसेना के संयुक्त प्रयासों ने सनी समेत 20 भारतीय जांबाजों की जान बचाई। घर पहुंचने पर सनी के परिवार की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। आइए जानते हैं कि आखिर समंदर की लहरों के बीच उस दिन क्या हुआ था और कैसे इन भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया।

Bulandshahar, Sunny Chaudhary

मर्चेंट नेवी कर्मी सनी चौधरी

खुर्जा के मोहल्ला मुरारीनगर के रहने वाले सनी चौधरी पिछले एक साल से मर्चेंट नेवी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह उनका दूसरा व्यावसायिक अनुबंध यानी कॉन्ट्रैक्ट था, जिसके तहत उनकी तैनाती एक मालवाहक जहाज पर की गई थी।

सनी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पूरी लगन से काम कर रहे थे। उनके परिवार में वे अपनी मां और दादा के साथ रहते हैं। पिता के असमय चले जाने के बाद मां ने ही उन्हें पाल-पोसकर इस मुकाम तक पहुंचाया था। सनी के मर्चेंट नेवी में जाने से पूरा परिवार बेहद खुश था, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस बार का सफर इतना चुनौतीपूर्ण और डरावना होने वाला है।

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एमटी जगवीर जहाज

जिस जहाज पर सनी चौधरी तैनात थे, उसका नाम ‘एमटी जगवीर’ था। यह कमर्शियल जहाज कोर फकान पोर्ट से माल लादकर भारत के न्यू मैंगलोर बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा था, तभी समंदर के अशांत क्षेत्र में यह सुरक्षा संकट में फंस गया।

सनी ने बताया कि 15 मई को अमेरिकी नौसेना ने सुरक्षा कारणों से उनके जहाज पर फायरिंग की और उन्हें तुरंत वापस लौटने का आदेश दिया। इसके बाद जहाज को ओमान के सिनास पोर्ट की तरफ मोड़ दिया गया। संकट की शुरुआत यहीं से हुई, क्योंकि करीब एक महीने तक यह जहाज समुद्र के बीचों-बीच ही खड़ा रहा। इस दौरान राशन और पानी की भारी किल्लत हो गई। जहाज पर सिर्फ 15 दिनों का राशन बचा था, जिसे चालक दल ने बेहद किफायत के साथ चलाकर किसी तरह 25 से 30 दिनों तक खींचा। इस पूरे समय में परिवार से उनका संपर्क पूरी तरह कट चुका था।

Bulandshahr, Sunny Chaudhary

ओमान की खाड़ी में मिसाइल हमला

मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब 11 जून की सुबह करीब 7:30 बजे बिना किसी चेतावनी के इस शांत खड़े जहाज पर अचानक एक जोरदार मिसाइल हमला हुआ।

हमला होते ही पूरे जहाज पर अफरा-तफरी मच गई। चारों तरफ काला धुआं फैल गया और आग की लपटें उठने लगीं। इस हमले में हरियाणा के रहने वाले रोहित यादव और देवरिया के सुल्तान गंभीर रूप से जख्मी हो गए, जबकि जहाज के चीफ ऑफिसर संदीप यादव सदमे के कारण अचेत हो गए। सनी ने बताया कि उस खौफनाक मंजर में उन्हें अपना बचपन, मां का आंचल और परिवार की यादें आ रही थीं। ऐसी गंभीर स्थिति में भी सनी ने सूझबूझ दिखाई और धुएं से भरे केबिन में घुसकर अपने और साथियों के जरूरी कूटनीतिक दस्तावेज और पासपोर्ट सुरक्षित निकाले।

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भारतीय दूतावास की त्वरित कार्रवाई

जैसे ही इस हमले की खबर भारत सरकार तक पहुंची, बिना वक्त गंवाए राजनयिक स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए गए और भारतीय दूतावास की त्वरित कार्रवाई देखने को मिली।

दूतावास ने तुरंत ओमान सरकार से संपर्क किया और उनके अनुरोध पर ओमान की नौसेना ने तत्काल एक आधुनिक युद्धपोत मौके पर रवाना किया। नौसैनिकों ने सूझबूझ से काम लेते हुए बेहद कम समय में सनी चौधरी समेत सभी 20 भारतीय कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सनी का कहना है कि अगर बचाव दल पहुंचने में कुछ घंटों की भी देरी हो जाती, तो किसी का भी जिंदा बचना नामुमकिन था। इसके बाद मस्कट में भारतीय दूतावास ने सभी के रहने, खाने और भारत वापसी के टिकटों का पूरा प्रबंध किया।

खुर्जा मर्चेंट नेवी युवक सुरक्षित लौटा

जब Bulandshahar का यह लाल अपने वतन वापस आया और खुर्जा मर्चेंट नेवी युवक सुरक्षित लौटा, तो पूरे इलाके में जश्न का माहौल बन गया।

सनी के इकलौते वारिस होने के कारण उनकी मां सीमा देवी, जो खुद दो बार गांव की प्रधान रह चुकी हैं, बेटे को गले लगाकर रो पड़ीं। दादा प्रिंस चौधरी ने भी पोते का स्वागत भावुक होकर किया। सनी ने अपनी सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार और ओमान दूतावास का दिल से आभार जताया है। इस दर्दनाक हादसे के सदमे से उबरने के लिए सनी ने फिलहाल मर्चेंट नेवी से कुछ समय का ब्रेक लेने का फैसला किया है, वहीं शिपिंग कंपनी ने भी सभी प्रभावित कर्मियों को उचित आर्थिक मुआवजा देने का भरोसा दिया है।

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