NAFED new auction portal launch: देश के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार लगातार डिजिटल कदम उठा रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) के नए ऑक्शन पोर्टल NAFEX.in की शुरुआत कर दी है। इस पोर्टल के आने से कृषि व्यापार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिले और उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए किसी तीसरे पक्ष पर निर्भर न रहना पड़े।

NAFED की चार नई पहलें
इस खास मौके पर अमित शाह ने बताया कि नाफेड ने अपने कामकाज को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए चार नई डिजिटल योजनाओं की शुरुआत की है। इनमें NAFEX.in पोर्टल के अलावा दृष्टि, ईआरपी (ERP) और नाफेड कल्याण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन तकनीकी बदलावों से नाफेड का प्रबंधन मजबूत होगा और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और तेजी से जमीन से जुड़े किसानों तक पहुंच सकेगा।
घाटे से मुनाफे तक का सफर
सहकारिता मंत्री ने NAFED के पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि साल 2014 में यह संस्था बेहद गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही थी। उस समय इसका वजूद बचाना भी मुश्किल लग रहा था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक अहम बैठक हुई और केंद्र सरकार ने नाफेड को वित्तीय मदद देकर दोबारा खड़ा किया। नतीजा यह है कि आज NAFED करीब 500 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा रहा है, इसका टर्नओवर 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और यह देश के लगभग 74 लाख किसानों की सीधे मदद कर रहा है।

बिचौलियों का खेल होगा खत्म
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अगले दो सालों के भीतर दलहन यानी दालों की पूरी खरीद सीधे किसानों से की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि व्यापारियों या बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए। जब किसान सीधे NAFED को अपनी फसल बेचेंगे, तो उन्हें मजबूरी में कम दाम पर अनाज नहीं बेचना पड़ेगा। व्यापारियों के हिस्से जाने वाला मुनाफा अब सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचेगा, जिससे उनकी कमाई में अच्छी बढ़ोतरी होगी।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
अमित शाह ने उम्मीद जताई कि जब किसानों को दालों की खेती का सही और मुनाफे वाला दाम मिलने लगेगा, तो वे इसकी बुवाई और ज्यादा करेंगे। इससे देश में दलहन का उत्पादन बढ़ेगा और भारत को दालों के आयात पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। किसानों से सीधे अनाज खरीदने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार कर लिया गया है और अब इसे हर गांव तक ले जाने की तैयारी है।
डिजिटल ऑक्शन पोर्टल की यह शुरुआत हमारे अन्नदाताओं के लिए एक बेहतरीन अवसर लेकर आई है। तकनीक के जरिए बिचौलियों को हटाकर सीधे किसानों से जुड़ने का यह प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा।
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