नई दिल्ली | विशेष संपादकीय
तारीख थी 16 मई 2014। चिलचिलाती धूप के बीच जब ईवीएम (EVM) के पिटारे खुले, तो भारतीय चुनावी इतिहास में एक ऐसा भूचाल आया जिसने दशकों पुराने किलों को ढहा दिया। 10 साल से सत्ता के गलियारों में काबिज यूपीए (UPA) सरकार को जनता ने विदा कर दिया और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘पूर्ण बहुमत’ वाली एनडीए सरकार का उदय हुआ। यह सिर्फ एक सत्ता परिवर्तन नहीं था, बल्कि उन करोड़ों उम्मीदों का हुंकार था, जिन्हें दशकों से ‘वादों के भंवर’ में उलझाकर रखा गया था।
आज जब हम 31 मार्च 2026 की दहलीज पर खड़े हैं, तो देश एक और ऐतिहासिक ‘टिक-मार्क’ लगाने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय की गई ‘नक्सल मुक्त भारत’ की डेडलाइन आज पूरी हो रही है। इस मौके पर डीडी न्यूज़ यूपी आपको ले चलता है पिछले 12 साल के उस सफर पर, जहाँ नामुमकिन को मुमकिन बनाने की इबारत लिखी गई।

1. राम लला का वनवास खत्म: 500 साल का इंतजार और 22 जनवरी की वो सुबह
बीजेपी के मेनिफेस्टो में ‘राम मंदिर’ महज एक वादा नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र था। 1990 के दशक से शुरू हुआ यह आंदोलन 2019 में अपने कानूनी अंजाम तक पहुँचा। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने सदियों पुराने विवाद पर विराम लगाया। 5 अगस्त 2020 को जब पीएम मोदी ने मंदिर का शिलान्यास किया, तो वह नए भारत के ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ की शुरुआत थी। 22 जनवरी 2024 को नागर शैली में बने भव्य मंदिर के उद्घाटन ने न केवल अयोध्या का भूगोल बदला, बल्कि देश की राजनीति में ‘राम राज्य’ की अवधारणा को हकीकत की जमीन पर उतार दिया।

2. धारा 370 का अंत: एक विधान, एक प्रधान और एक निशान
आजादी के समय लगी ‘धारा 370’ की बेड़ियाँ जम्मू-कश्मीर के विकास के पैरों में जंजीर बनी हुई थीं। 5 अगस्त 2019 को गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जब इस धारा को निरस्त करने का ऐलान किया, तो पूरी दुनिया सन्न रह गई। कश्मीर को विशेष राज्य के दर्जे से मुक्त कर दो केंद्र शासित प्रदेशों (लद्दाख और जम्मू-कश्मीर) में बांट दिया गया। आज 2026 में कश्मीर की वादियों में पत्थरबाजी की जगह पर्यटकों का शोर और अलगाववाद की जगह तिरंगे की शान दिखाई देती है। यह मोदी सरकार का वो ‘साहसिक फैसला’ था जिसे दशकों तक ‘अछूत’ माना जाता रहा।

3. तीन तलाक: मुस्लिम महिलाओं को मिला सम्मान का अधिकार
सामाजिक सुधारों की फेहरिस्त में ‘तीन तलाक’ (तलाक-ए-बिद्दत) को खत्म करना मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। 1 अगस्त 2019 को जब इस कुप्रथा को अवैध घोषित किया गया, तो करोड़ों मुस्लिम महिलाओं को उस डर से आजादी मिली जो ‘डिजिटल’ या ‘मौखिक’ तलाक के रूप में उनके सिर पर तलवार की तरह लटकता था। 3 साल की जेल और गैर-जमानती अपराध के प्रावधान ने समाज के एक बड़े वर्ग को सुरक्षा और सम्मान की मुख्यधारा से जोड़ा।
4. नारी शक्ति वंदन: तीन दशक का इंतजार और सर्वसम्मति का रिकॉर्ड
संसद में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का सपना 1996 से फाइलों में धूल फांक रहा था। कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन ‘आम राय’ के अभाव में यह बिल हर बार गिर जाता था। सितंबर 2023 में मोदी सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पेश किया। विडंबना देखिए, जो पार्टियाँ सालों तक इसका विरोध करती रहीं, उन्हें भी मोदी सरकार के इस मास्टरस्ट्रोक के सामने झुकना पड़ा। लोकसभा में 454-0 और राज्यसभा में 214-0 का प्रचंड बहुमत इस बात का गवाह बना कि महिला सशक्तिकरण अब महज चुनावी नारा नहीं, बल्कि संवैधानिक हक है।

5. CAA: शरणार्थियों को मिला घर और सम्मान
पड़ोसी देशों में धार्मिक प्रताड़ना का शिकार होकर भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों के लिए 11 मार्च 2024 की तारीख ‘पुनर्जन्म’ जैसी थी। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के लागू होने से उन लाखों लोगों को नागरिकता मिली जो दशकों से ‘अवैध प्रवासी’ का दंश झेल रहे थे। हालांकि इस पर काफी राजनीतिक शोर मचा, लेकिन सरकार ने अडिग रहते हुए साफ किया कि यह ‘नागरिकता देने’ का कानून है, लेने का नहीं।
6. महा-उपलब्धि: लाल आतंक का सूर्यास्त और ‘नक्सल मुक्त भारत’
अब बात करते हैं आज की सबसे बड़ी खबर की। साल 2013 तक भारत के 126 जिलों में ‘लाल आतंक’ का खौफ था। नेपाल की सीमा से लेकर आंध्र प्रदेश तक एक ‘रेड कॉरिडोर’ बना हुआ था, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा नासूर था। गृह मंत्री अमित शाह ने जब 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय की, तो सुरक्षा बलों ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई।

कैसे टूटा नक्सलियों का गुरूर?
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रणनीतिक प्रहार: बीते 12 साल में नक्सलियों का प्रभाव 126 जिलों से घटकर मात्र 18 तक सिमट गया।
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सरेंडर और एनकाउंटर: गृह मंत्री की डेडलाइन के बाद पिछले कुछ महीनों में सैकड़ों खूंखार कमांडरों ने या तो हथियार डाल दिए या एनकाउंटर में ढेर हो गए।
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विकास का पहिया: सड़क, पुल और स्कूलों के निर्माण ने नक्सलियों के उस ‘नैरेटिव’ को खत्म कर दिया जिसमें वे आदिवासियों को सरकार के खिलाफ भड़काते थे।
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आज का दिन: आज 31 मार्च 2026 को भारत आधिकारिक तौर पर खुद को ‘नक्सल मुक्त’ घोषित करने की ओर बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर झारखंड के जंगलों तक अब गोलियों की गूँज नहीं, बल्कि विकास का संगीत सुनाई दे रहा है।
विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम
2014 में शुरू हुआ यह सफर अब 2026 में एक ऐसे मुकाम पर है जहाँ ‘असंभव’ शब्द डिक्शनरी से बाहर होता दिख रहा है। राम मंदिर से लेकर नक्सल मुक्त भारत तक, मोदी सरकार ने उन बुनियादी मुद्दों को हल किया है जो भारत की प्रगति की राह में रोड़ा थे। आज जब हम इस ऐतिहासिक दिन को देख रहे हैं, तो यह साफ है कि 12 साल पहले जनता ने जो जनादेश दिया था, उसकी पाई-पाई का हिसाब वादों को हकीकत में बदलकर दिया जा रहा है।