Crude Oil Price Drop: अगर आप भी पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं और लंबे समय से तेल के दाम कम होने का इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है। मिडिल ईस्ट यानी मध्य पूर्व में लंबे समय से चल रही जंग अब थमने की कगार पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक ऐसा दावा किया है, जिससे पूरी दुनिया के शेयर बाजारों और तेल मार्केट में हलचल तेज हो गई है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ट्रम्प ने ऐसा क्या कहा है जिससे आम जनता को बड़ा फायदा हो सकता है।
दुनिया भर के बाजारों को प्रभावित करने वाला यह Crude Oil Price Drop अमेरिकी राष्ट्रपति के एक बड़े बयान के बाद देखने को मिल सकता है। डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग को पूरी तरह खत्म करने का ऐतिहासिक समझौता ‘लगभग फाइनल’ हो चुका है। ट्रम्प के मुताबिक, इस समझौते की आखिरी बारीक कड़ियों (डिटेल्स) पर काम तेजी से चल रहा है। इस खबर के बाहर आते ही एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में एक बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
ओवल ऑफिस से ट्रम्प का बड़ा कूटनीतिक कदम
इस समझौते को अंजाम देने के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस से एक बेहद खास और बड़ी जॉइंट कॉल की। इस बातचीत में उन्होंने मिडिल ईस्ट और अन्य मुस्लिम देशों के सबसे प्रभावशाली नेताओं को एक साथ लाइन पर लिया। इनमें सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति, कतर के अमीर, तुर्की और मिस्र के राष्ट्रपति के साथ-साथ पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी शामिल थे। इसके अलावा ट्रम्प ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी अलग से बात करके इस शांति समझौते का पूरा खाका तैयार किया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना है असली गेमचेंजर
इस पूरे शांति समझौते की सबसे बड़ी बात जो वैश्विक बाजार में Crude Oil Price Drop का कारण बनने जा रही है, वह है ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) का दोबारा खोला जाना। जंग की वजह से ईरान ने इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बंद कर दिया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया भर में होने वाली कुल तेल सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा यानी 20% तेल सिर्फ इसी एक रास्ते से होकर जहाजों के जरिए गुजरता है। इस लाइफलाइन के दोबारा खुलने की उम्मीद ने ही कच्चे तेल के बाजारों में नरमी ला दी है।
जंग की शुरुआत से अब तक तेल की कीमतों का हाल
अगर हम इस विवाद के इतिहास और तेल की कीमतों पर नजर डालें, तो जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हवाई हमले किए थे, तब कच्चा तेल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बिक रहा था। जंग बढ़ने के साथ ही मार्च-अप्रैल तक इसके दाम आसमान छूते हुए 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचे। इसके बाद अप्रैल की शुरुआत में जब दोनों पक्ष युद्धविराम (सीजफायर) के लिए राजी हुए, तब कीमतें 100 डॉलर से नीचे आईं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है, जिसमें अब बड़ी गिरावट आने की पूरी उम्मीद है।
ईरान को अभी भी अमेरिका पर पूरा भरोसा नहीं
हालांकि, एक तरफ जहां कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिकी प्रशासन की नीयत पर थोड़ा शक भी जताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा है कि वे समझौते के बहुत करीब भी हैं और पुरानी कड़वी यादों के कारण दूर भी। ईरान का मानना है कि अमेरिकी सरकार अक्सर अपने ही बयानों का खंडन कर देती है और रुख बदल लेती है। इसके अलावा ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम जैसे बेहद विवादित मुद्दों पर भी स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।







