संतूर ने जीता जापानी पीएम Sanae Takaichi का दिल, Tokyo में भारतीय दूतावास ने विस्तार से दी जानकारी

Sanae Takaichi

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भारत और जापान के बीच के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बेहद गहरे हैं। जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संतूर बजाकर भारतीय संगीत की विरासत को नई ऊंचाई दी है। इस बेहद खास पल के बाद टोक्यो में भारतीय दूतावास ने सोमवार को इस घटना पर विस्तार से जानकारी देते हुए संतूर की सांस्कृतिक महत्व को उजागर किया और बताया कि कैसे एक संगीत वाद्ययंत्र दो अलग-अलग संस्कृतियों को आपस में जोड़ सकता है।

लंच के दौरान जापानी पीएम Sanae Takaichi ने आजमाया संतूर पर हाथ

दरअसल, यह पूरा वाकया 2 जुलाई का है जब प्रधानमंत्री मोदी की ओर से एक लंच का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में मेहमानों के मनोरंजन और भारतीय कला से रूबरू कराने के लिए पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन किया जा रहा था। इसी दौरान वहां मौजूद एक संगीतकार के आमंत्रण पर जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची खुद को रोक नहीं पाईं। उन्होंने आगे बढ़कर संतूर बजाने की कोशिश की और उनके इस अंदाज ने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित किया, जिसके लिए उन्हें खूब सराहना बटोरी।

इस खूबसूरत तालमेल पर भारतीय दूतावास ने कहा, “प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संतूर बजाने का प्रदर्शन दुनिया भर के दर्शकों को गहराई से प्रभावित करने वाला रहा। यह आकर्षक वाद्ययंत्र सदियों से भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा रहा है।”

कश्मीर से जुड़ा है इस वाद्ययंत्र का इतिहास

अगर संतूर की बात करें, तो यह एक हैमर्ड स्ट्रिंग इंस्ट्रूमेंट है, जिसमें लगभग 100 तार होते हैं। इसे अखरोट की लकड़ी से तैयार किया जाता है और ‘मेज़राब’ नाम की हल्की लकड़ी की छड़ियों से बजाया जाता है। माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति फारस (ईरान) में हुई थी, लेकिन कश्मीर की वादियों में आकर इसका एक अनोखा विकास हुआ। प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में इसे ‘शत-तंत्री वीणा’ यानी सौ तारों वाली वीणा भी कहा गया है। यह पारंपरिक रूप से सूफियाना मौसिकी का एक अहम हिस्सा रहा है।

20वीं शताब्दी में पंडित शिवकुमार शर्मा ने संतूर को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में नया आयाम दिया और इसे वैश्विक मंच पर लोकप्रिय बनाया। भारतीय दूतावास ने इस अवसर को भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने का सुनहरा मौका बताया। ताकाइची के संतूर बजाने के वीडियो ने सोशल मीडिया पर भी काफी ध्यान आकर्षित किया है। यह घटना भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और मजबूत करने का प्रतीक बन गई है।

संगीत की कोई सीमा नहीं होती और जापान की प्रधानमंत्री का संतूर बजाना इसी बात का जीवंत उदाहरण है। इस तरह के छोटे लेकिन दिल छू लेने वाले पल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देशों के आपसी रिश्तों को और अधिक मानवीय और मजबूत बनाते हैं।

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