Global MSME Hub: भारत की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और तकनीकी रूप से समृद्ध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारत की अगुवाई में बीते 26 मई को ‘न्यू इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन पर ब्रिक्स पार्टनरशिप’ (PartNIR) के तहत दूसरी एसएमई वर्किंग ग्रुप SME Working Group बैठक का सफल आयोजन किया गया।
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of MSME) द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य विषय “MSMEs के लिए प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) तक पहुंच बढ़ाना” (Enhancing Access to Technology for MSMEs) रखा गया था। बैठक में सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने छोटे व्यवसायों को आधुनिक बनाने, नवाचार (Innovation) को बढ़ावा देने और कार्यबल को नई तकनीकों के लिए तैयार करने पर विस्तृत चर्चा की।
Global MSME Hub: वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ेंगे छोटे उद्योग
मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और नवाचार में एमएसएमई क्षेत्र की भागीदारी को कई गुना बढ़ाना है। बैठक के दौरान मुख्य रूप से दो विशेष सत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया:
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नवाचार और प्रौद्योगिकी का व्यावसायीकरण (Harnessing Innovations and Technology Commercialization): छोटे उद्योगों द्वारा विकसित की जा रही नई तकनीकों और इनोवेशंस को बाजार तक कैसे पहुंचाया जाए और उनका व्यावसायिक उपयोग कैसे बढ़े।
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उद्योग-अनुकूल मैनपावर का विकास (Skilling and Development of Industry-Ready Manpower): एमएसएमई उद्योगों में नई तकनीकों और डिजिटल टूल्स को आसानी से अपनाने के लिए कुशल और तकनीकी रूप से तैयार कार्यबल (Workforce) को तैयार करना।
चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि डिजिटल समावेशन (Digital Inclusion) और मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम के जरिए ही एमएसएमई क्षेत्र के तकनीकी अंतर (Technology Gap) को पाटा जा सकता है।
भारत के नेतृत्व में पहली बार आयोजित होगा ‘ब्रिक्स एमएसएमई फोरम’
PartNIR फ्रेमवर्क के तहत भारत इस वर्ष एसएमई वर्किंग ग्रुप का नेतृत्व कर रहा है। अपनी इस अध्यक्षता के दौरान भारत की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है:
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एक्शन प्लान: भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान कुल तीन एसएमई वर्किंग ग्रुप बैठकों की मेजबानी करेगा।
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ऐतिहासिक शुरुआत: इसके साथ ही भारत पहली बार ‘ब्रिक्स एमएसएमई फोरम’ (BRICS MSME Forum) के उद्घाटन सत्र का भी आयोजन करने जा रहा है।
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मुख्य प्राथमिकताएं: इस पूरे कार्यकाल के दौरान भारत का मुख्य ध्यान छोटे उद्योगों के लिए ‘वित्त तक आसान पहुंच’ (Access to Finance), ‘तकनीकी सुलभता’ (Technology Access) और ‘सतत विकास’ (Sustainability-oriented Growth) सुनिश्चित करने पर रहेगा।
समान विकासात्मक चुनौतियों से निपटने में मिलेगी मदद: मंत्रालय
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने इस बैठक को “अत्यधिक सफल और उत्पादक” बताते हुए कहा कि इसने समान विकासात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे देशों के बीच नीतिगत आदान-प्रदान (Policy Exchange) को एक मजबूत मंच दिया है। ब्रिक्स देशों के इस साझा प्रयास से सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी सहयोग गहरा होगा, जिससे आने वाले समय में एक लचीला, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एमएसएमई क्षेत्र तैयार किया जा सकेगा।






