CM Yogi: उत्तर प्रदेश में जब भी मुद्दा कानून-व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाए रखने और धार्मिक सौहार्द को कायम रखने का होता है, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अंदाज और मिजाज हमेशा कड़े एक्शन से भरा नजर आता है। आगामी 28 मई 2026 को होने वाले बकरीद (ईद-उल-अजहा) के त्योहार के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने शासन और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ एक हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक की।
इस बैठक के दौरान CM Yogi ने तीखे तेवर दिखाते हुए साफ संदेश दिया है कि त्योहारों की आड़ में किसी भी प्रकार की अराजकता, सड़कों पर जाम या नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, CM Yogi के इन सख्त दिशा-निर्देशों के धरातल पर उतरने से पहले ही उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में घमासान शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने जहां इसे टारगेटेड राजनीति बताया है, वहीं सत्तापक्ष ने इसे कानून व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा करार दिया है।
सड़क पर नमाज नहीं, खुले में कुर्बानी पर रोक; देखें CM Yogi की सख्त गाइडलाइन
CM Yogi ने स्पष्ट किया है कि त्योहार मनाना सभी का अधिकार है, लेकिन यह दूसरों के नागरिक अधिकारों और यातायात को प्रभावित करके नहीं होना चाहिए। बैठक में जारी किए गए मुख्य निर्देश इस प्रकार हैं:
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सड़कें जाम करने पर पूर्ण पाबंदी: CM Yogi ने दो टूक लहजे में कहा कि सड़क जाम कर या यातायात को बाधित कर सार्वजनिक मार्गों पर नमाज पढ़ने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी।
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पारंपरिक स्थलों का उपयोग: सभी धार्मिक आयोजन, जलसे और सामूहिक नमाज केवल उनके पूर्व निर्धारित, पारंपरिक और नियत स्थलों पर ही आयोजित किए जाने चाहिए।
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खुले में कुर्बानी वर्जित: सार्वजनिक स्थलों, पार्कों, सड़कों या रिहायशी सोसायटियों के खुले रास्तों पर कुर्बानी देने की अनुमति नहीं होगी।
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प्रतिबंधित पशुओं को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’: गोवंश या किसी भी प्रतिबंधित पशु की कुर्बानी को लेकर पुलिस को ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने और देखते ही सख्त कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है।
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अवैध स्लॉटर हाउस पर एक्शन: पूरे प्रदेश में अवैध स्लॉटर हाउसों (बूचड़खानों) को बंद रखने और खुले में मांस की बिक्री व प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ तत्काल छापेमारी कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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कठोरतम कार्रवाई की चेतावनी: मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी राजीव कृष्णा और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश को निर्देश दिए गए हैं कि नियमों की अवहेलना करने वाले उपद्रवियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोरतम धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए।
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गाइडलाइन पर छिड़ा सियासी संग्राम
जैसे ही मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से यह गाइडलाइन और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई, यूपी की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। पक्ष और विपक्ष के बड़े नेताओं के बीच बयानों के तीर चलने लगे हैं:
विपक्ष ने सरकार के इन कड़े नियमों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। विपक्ष का आरोप है कि त्योहारों से ठीक पहले इस तरह की एकतरफा कड़ाई और स्लॉटर हाउसों पर कार्रवाई के नाम पर कतिपय वर्गों को मानसिक रूप से परेशान करने और ध्रुवीकरण की राजनीति की जा रही है। परंपराओं को प्रशासनिक दबाव से नहीं रोका जाना चाहिए।
सरकार का पलटवार: विपक्ष के इन हमलों का जवाब देते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कानून-व्यवस्था और सड़कों को साफ व सुरक्षित रखना किसी मजहब का नहीं, बल्कि आम जनता की सुरक्षा का मामला है। सड़कें नमाज पढ़ने या ट्रैफिक रोकने के लिए नहीं होती हैं। उन्होंने साफ कहा कि योगी सरकार का यह फैसला बिना किसी भेदभाव के प्रदेश के सभी नागरिकों को एक सुरक्षित माहौल देने के लिए है और इसका स्वागत होना चाहिए।






