Breast Cancer Treatment: वैज्ञानिकों ने बनाया NIR लाइट से चलने वाला नैनोरोबोट, टारगेट करके नष्ट करेगा | DD News Uttar Pradesh

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Breast Cancer Treatment : कैंसर इलाज की दुनिया में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक बेहद क्रांतिकारी और उम्मीद भरी कामयाबी हासिल की है। मोहाली स्थित नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (INST) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा उन्नत, प्रकाश-सक्रिय बहुक्रियाशील नैनोरोबोट विकसित किया है, जो स्तन कैंसर के इलाज में नया मोड़ ला सकता है। यह नैनोरोबोट निकट-अवरक्त (NIR) प्रकाश की मदद से सक्रिय होकर सीधे कैंसर कोशिकाओं तक पहुंचता है और उन्हें जड़ से नष्ट करने का काम करता है।

पारंपरिक कीमोथेरेपी की सीमाओं को लांघने की दिशा में बड़ा कदम

स्तन कैंसर आज भी दुनियाभर में महिलाओं के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बना हुआ है। अब तक अपनाई जाने वाली पारंपरिक कीमोथेरेपी के कई गंभीर दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं, जिनमें स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचना, दवाओं का निष्प्रभावी होना और ट्यूमर तक दवा की सीमित पहुंच शामिल है। इसके अलावा, मौजूदा नैनोमेडिसिन में दवाओं के स्थानिक नियंत्रण की कमी एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन इस नई नैनोरोबोटिक्स तकनीक के आने से अब ट्यूमर को बिना किसी बड़े साइड इफेक्ट के सीधे निशाना बनाया जा सकेगा।

फोटोटैक्सिस और फोलिक एसिड से कैंसर कोशिकाओं का सटीक शिकार

INST मोहाली के डॉ. जिबन ज्योति पांडा और BARC मुंबई के डॉ. संतोष के. गुप्ता के मार्गदर्शन में तैयार किए गए ये नैनोबोट बेहद अनूठे हैं। इन नैनोबोट्स की सतह पर फोलिक एसिड की कोटिंग की गई है, जो स्तन कैंसर की कोशिकाओं की पहचान कर सीधे उन्हीं पर हमला बोलती है। जब 980 एनएम की एनआईआर (NIR) लेजर लाइट इन पर डाली जाती है, तो नैनोबोट में मौजूद पॉलीडोपामीन गर्मी पैदा करता है। इस तापीय ऊर्जा से नैनोबोट प्रकाश की दिशा में सक्रिय होकर चलने लगते हैं (जिसे फोटोटैक्सिस कहते हैं) और सीधे ट्यूमर तक पहुंच जाते हैं।

फोटोथर्मल और फोटोडायनामिक थेरेपी का दोहरा वार

इस तकनीक की सबसे खास बात इसका दोहरा प्रभाव है। नैनोबोट्स प्रकाश के संपर्क में आते ही फोटोथर्मल प्रभाव से अत्यधिक तापमान उत्पन्न करते हैं और साथ ही प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियां (ROS) बनाते हैं। यह डबल अटैक कैंसर कोशिकाओं को पूरी तरह नष्ट कर देता है। प्रयोगशाला में कोशिकीय मॉडल और स्तन ट्यूमर वाले चूहों पर किए गए सफल परीक्षणों ने साबित किया है कि यह संयुक्त थेरेपी किसी भी सिंगल इलाज के मुकाबले कई गुना ज्यादा असरदार है।

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