संसद में ‘शाह’ का वार: राहुल गांधी पर साधा निशाना, बोले- ‘नक्सल समर्थकों के साथ मंच साझा करने वाली कांग्रेस का असली चेहरा बेनकाब’

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नई दिल्ली | विशेष संसदीय रिपोर्ट

नक्सल मुक्त भारत की ऐतिहासिक डेडलाइन (31 मार्च 2026) से ठीक 24 घंटे पहले, देश की संसद एक अभूतपूर्व बहस की गवाह बनी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन के पटल से न केवल नक्सलियों के खात्मे का ऐलान किया, बल्कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखे हमलों की बौछार कर दी। शाह ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि जिस विचारधारा ने देश को दशकों तक लहूलुहान किया, उसे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का मौन और कभी-कभी प्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त था।

राहुल गांधी पर सीधा हमला: ‘नक्सली समर्थकों के साथ मंच साझा किया’

अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे कई बार ऐसे लोगों के साथ खड़े दिखे हैं जो नक्सली विचारधारा का पोषण करते हैं। शाह ने सदन में कहा, “राहुल गांधी ने न केवल नक्सल समर्थकों के साथ मंच साझा किया, बल्कि उन्होंने नक्सलवाद का समर्थन भी किया। खूंखार नक्सली कमांडर हिडमा के मारे जाने के खिलाफ हुए प्रदर्शनों का वीडियो राहुल गांधी द्वारा शेयर करना उनकी मानसिकता को दर्शाता है।” शाह ने आगे कहा कि जब देश की सुरक्षा एजेंसियां नक्सलियों के किले ढहा रही थीं, तब कांग्रेस उन्हें बचाने की ‘वकालत’ कर रही थी।

‘नक्सली बन गए कांग्रेसी नेता’: सत्ता और विचारधारा का गठजोड़

अमित शाह ने भारत में नक्सलवाद के पनपने के लिए 1970 से 2004 तक के कालखंड को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आंकड़ों के साथ तंज कसा कि इस दौरान केवल 4 वर्षों को छोड़कर लगभग पूरे समय कांग्रेस का शासन रहा। शाह ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, “बिना सत्ता के संरक्षण के ‘लाल आतंक’ का फलना-फूलना मुमकिन ही नहीं था। नक्सलियों के साथ रहते-रहते कांग्रेस के कई नेता खुद नक्सलवादी मानसिकता के शिकार हो गए हैं।” उन्होंने साफ लहजे में कहा कि देश की जनता इस ‘अपवित्र गठबंधन’ का जवाब आने वाले चुनावों में जरूर देगी।

‘गोली का जवाब गोली से’: लोकतंत्र में धमकियों की जगह नहीं

विपक्ष के शोर-शराबे के बीच गृह मंत्री ने मोदी सरकार की ‘आयरन फिस्ट’ (लौह नीति) को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के संविधान को चुनौती देने वालों के दिन अब लद चुके हैं। शाह ने गर्जना करते हुए कहा:

  • बातचीत की शर्त: सरकार केवल उन्हीं से संवाद करेगी जो हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं।

  • सख्त कार्रवाई: जो सुरक्षाबलों पर गोली चलाएगा, उसका जवाब गोली से ही दिया जाएगा।

  • निडर सरकार: यह सरकार किसी की धमकी या दबाव में आने वाली नहीं है। हम एक लोकतंत्र हैं और यहाँ न्याय की लाठी सबसे मजबूत है।

अमित शाह के इस भाषण ने यह साफ कर दिया है कि 31 मार्च 2026 के बाद भारत में नक्सलवाद के लिए कोई जगह नहीं होगी। शाह ने अपने भाषण का अंत इस संकल्प के साथ किया कि मोदी सरकार की सबसे बड़ी सिद्धि ‘नक्सल-मुक्त भारत’ है, जिसे अब कोई भी झुठला नहीं सकता। उन्होंने कांग्रेस को आत्ममंथन की सलाह देते हुए कहा कि जो दल नक्सलियों के मानवाधिकारों की चिंता करता था, उसने शहीद जवानों के परिवारों के प्रति कभी संवेदना नहीं दिखाई।

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