Agra: डिजिटल दुनिया में एक छोटी सी लापरवाही भी कितनी भारी पड़ सकती है, इसका एक बड़ा मामला उत्तर प्रदेश के आगरा से सामने आया है। आगरा साइबर पुलिस ने देश भर में लोगों को निशाना बनाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह फर्जी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) आईडी, फर्जी लिंक और एपीके (APK) फाइल भेजकर लोगों के बैंक खातों में सेंध लगा रहा था। पुलिस ने मामले में दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सिद्धार्थनगर निवासी आयुष कुमार और उत्तराखंड के उधम सिंह नगर निवासी राजा उर्फ गुल प्रेम कुमार को गिरफ्तार किया है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब आगरा के ही एक स्थानीय निवासी ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि उसकी व्यक्तिगत जानकारी और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर उसकी जानकारी के बिना जन सेवा केंद्र खोला गया है, जिसका इस्तेमाल ठगी के लिए हो रहा है। इसके बाद साइबर पुलिस हरकत में आई और जांच शुरू की।
फर्जी लिंक और एपीके फाइल से खाली होते थे खाते
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पीड़ितों की केवाईसी (KYC) और अन्य दस्तावेजों का दुरुपयोग करके फर्जी सीएससी सेंटर चलाते थे। यह गिरोह आम लोगों को मोबाइल पर फर्जी लिंक या संदिग्ध एपीके फाइलें भेजता था।
जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता या ऐप इंस्टॉल करता, ठगों को उनके मोबाइल और बैंक अकाउंट का पूरा एक्सेस मिल जाता था। इसके बाद वे पलक झपकते ही पीड़ित का खाता खाली कर देते थे।
दुबई और कई राज्यों से जुड़े हैं तार
पुलिस जांच में पता चला है कि सिर्फ आगरा के इस एक फर्जी सीएससी सेंटर से ही लगभग 10 से 12 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की गई थी। इसके अलावा, गिरोह के बाकी सदस्य अलग-अलग राज्यों में बैठकर देश भर में 50 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगा चुके हैं।
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस सिंडिकेट के तार दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि दुबई से भी जुड़े हुए हैं, जो दिखाता है कि इनका नेटवर्क कितना बड़ा था।
पांच आरोपी रडार पर, डिजिटल डिवाइस जब्त
डीसीपी (वेस्ट) आदित्य कुमार ने बताया कि इस मामले में पांच अन्य आरोपी भी पुलिस के रडार पर हैं, जो बैंक खाते उपलब्ध कराने और तकनीकी मदद देने का काम करते थे। गिरफ्तार मुख्य आरोपी का पहले भी आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ आगरा, जौनपुर तथा गुरुग्राम में मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस ने आरोपियों के डिजिटल डिवाइस और सीएससी वॉलेट जब्त किए हैं, जिनमें अब तक 1 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेनदेन मिले हैं।







