Ashadha Amavasya : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर मंगलवार को त्रिवेणी संगम पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान कर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति, परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में सुख-शांति की कामना की। संगम तट पर पूरे दिन धार्मिक आस्था और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न किए। कई लोगों ने अपने पितरों की स्मृति में ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री का दान किया। संगम क्षेत्र में वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बीच श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से धार्मिक कर्मकांड करते नजर आए।
Ashadha Amavasya संगम तट पर मौजूद संत-महात्माओं ने बताया कि Ashadha Amavasya का दिन सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। उनका कहना था कि इस तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान करने और पितरों के निमित्त तर्पण एवं दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। उन्होंने बताया कि इस बार अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ने से इसका धार्मिक महत्व और अधिक माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए धार्मिक कार्यों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है। संगम में स्नान करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी इस अवसर को अत्यंत पुण्यदायी बताया। उनका कहना था कि आषाढ़ अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण और दान-पुण्य करने से आत्मिक संतोष की अनुभूति होती है। श्रद्धालुओं ने देश और समाज की खुशहाली, परिवार के कल्याण तथा सभी के मंगल की कामना करते हुए मां गंगा से प्रार्थना की।
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आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गईं। घाटों पर सुरक्षा बलों की तैनाती रही और प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए। श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक स्नान और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ अमावस्या पितृ स्मरण, दान और पुण्य कार्यों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पहुंचे और सनातन परंपरा के अनुरूप धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।







