PM Modi New Zealand visit: 6 दिवसीय दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचेंगे PM Modi, ‘किया ओरा मोदी’ का होगा आयोजन

PM Modi New Zealand visit

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PM Modi New Zealand visit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने छह दिवसीय द्विपक्षीय विदेशी दौरे के अंतिम और बेहद महत्वपूर्ण चरण में न्यूजीलैंड (New Zealand) पहुंचने वाले हैं। दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में हुए बड़े फैसलों और आगामी व्यापारिक रूपरेखा को देखते हुए इस दौरे को रणनीतिक रूप से बेहद खास माना जा रहा है। न्यूजीलैंड में रहने वाला भारतीय समुदाय इस ऐतिहासिक पल को लेकर बेहद उत्साहित है और प्रधानमंत्री के स्वागत में ऑकलैंड में एक बड़े कार्यक्रम की तैयारी कर रहा है। चार दशकों के लंबे इंतजार के बाद हो रहे इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा, तकनीक और खेल जैसे कई मोर्चों पर आपसी सहयोग की एक नई शुरुआत होने की उम्मीद है।

PM Modi New Zealand visit: ऑकलैंड में द्विपक्षीय बैठकों और कार्यक्रमों की रूपरेखा

New Zealand में भारत की उच्चायुक्त मुआनपुई सैयावी ने प्रधानमंत्री के इस दौरे के मुख्य एजेंडे को लेकर कुछ अहम जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि ऑकलैंड में इस यात्रा की शुरुआत New Zealand सरकार के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत से होगी, जिसमें दोनों देशों के शीर्ष नेता हिस्सा लेंगे। इस बातचीत के तुरंत बाद एक बड़ा बिजनेस इवेंट आयोजित किया जाएगा, जिसमें दोनों देशों के बड़े निवेशक और उद्योगपति शामिल होंगे। इसके साथ ही इस दौरे में एक स्पोर्टिंग इवेंट यानी खेल कार्यक्रम को भी शामिल किया गया है।

उच्चायुक्त ने कहा कि हालांकि वे अभी सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों से कार्यक्रम की पूरी बारीक डिटेल्स साझा नहीं कर सकती हैं, लेकिन ये इस दौरे के सबसे मुख्य बिंदु रहने वाले हैं। इन सबके साथ ही इस व्यस्त कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के साथ एक बड़ा और खास मुलाकात का सत्र भी रखा गया है।

चालीस साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक स्वागत

ऑकलैंड में भारत के पूर्व कॉन्सुल भाव ढिल्लों ने इस दौरे के समय और इसके महत्व पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि PM Modi सिर्फ एक दिन के लिए न्यूजीलैंड में रहने वाले हैं, जिसकी वजह से इस दौरे का एक-एक पल बहुत ज्यादा कीमती और अहम हो गया है।

New Zealand में रह रहे भारतीय लोग पिछले 40 सालों से भी ज्यादा समय से किसी भारतीय प्रधानमंत्री के यहां आने का इंतजार कर रहे थे। इस बेहद खास मौके को हमेशा के लिए यादगार बनाने के लिए पूरे समुदाय ने मिलकर ऑकलैंड के मशहूर स्पार्क एरिना में एक भव्य स्वागत समारोह की तैयारी की है, जिसे पारंपरिक और स्थानीय संस्कृति को जोड़ते हुए ‘किया ओरा मोदी’ नाम दिया गया है। पूर्व कॉन्सुल ने कहा कि साल 1986 के बाद पहली बार न्यूजीलैंड भारत के किसी प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो इस यात्रा को सच में एक ऐतिहासिक घटना बनाता है।

व्यापार और कृषि क्षेत्र में साझेदारी के नए रास्ते

पिछले कुछ महीनों में India और New Zealand के बीच कूटनीतिक स्तर पर काफी तेजी देखने को मिली है। दोनों देशों ने एयर कनेक्टिविटी एग्रीमेंट, मुक्त व्यापार समझौते की रूपरेखा और कई अन्य अहम पहलों पर काम किया है, जिससे आपसी रिश्तों को काफी मजबूती मिली है। पूर्व कॉन्सुल भाव ढिल्लों का मानना है कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के उद्योगों के लिए तरक्की के बहुत बड़े मौके खोलने जा रहा है।

New Zealand कृषि तकनीक (एग्री-टेक) के मामले में दुनिया के सबसे उन्नत देशों में से एक है और इसके साथ ही वह हाई-टेक सामान व सर्विसेज में भी काफी आगे है। ऐसे में भारतीय बिजनेसमैन और कंपनियां भारत के कृषि क्षेत्र को और ज्यादा आधुनिक व मजबूत बनाने के लिए न्यूजीलैंड की कंपनियों के साथ मिलकर जॉइंट वेंचर और नई साझेदारियों पर काम कर सकते हैं।

बढ़ते भारतीय मध्यम वर्ग और फूड प्रोडक्ट्स की मांग

नौहरिया ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर रोशन नौहरिया ने इस समझौते के आर्थिक फायदों पर गहराई से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस तरह के व्यापारिक समझौतों से दोनों ही देशों की अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुंचता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड का पहले से ही चीन के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता है, जो कि दुनिया की एक बहुत बड़ी मैन्युफैक्चरिंग इकॉनमी है। इसके बावजूद न्यूजीलैंड अपने उच्च गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट्स के दम पर चीन के साथ ट्रेड सरप्लस यानी व्यापार में मुनाफे की स्थिति बनाए रखने में कामयाब रहा है।

न्यूजीलैंड के खाद्य उत्पादक और किसान अपनी क्वालिटी के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं और इंटरनेशनल मार्केट में उनके डेयरी व फूड प्रोडक्ट्स की भारी मांग रहती है। रोशन नौहरिया ने आगे कहा कि जैसे-जैसे भारत का मध्यम वर्ग तेजी से बढ़ रहा है, वैसे-वैसे भारतीय उपभोक्ताओं की परचेजिंग पावर यानी खर्च करने की क्षमता भी बढ़ रही है, जिससे भारत में प्रीमियम क्वालिटी वाले फूड प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है।

पुरानी यादें और सुपरपावर बनते भारत की भूमिका

PM Modi के इस दौरे का स्वागत करते हुए रोशन नौहरिया ने अपने पुराने अनुभवों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उन्हें आज भी साल 1986 का वह समय अच्छी तरह याद है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी न्यूजीलैंड के दौरे पर आए थे और उन्हें उनके सम्मान में रखे गए आधिकारिक डिनर में शामिल होने का सौभाग्य मिला था।

इतने लंबे समय बाद दोबारा किसी भारतीय प्रधानमंत्री के आने से पूरा भारतीय समाज गर्व महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आने वाले दो दशकों में एक ग्लोबल सुपरपावर बनने की राह पर अग्रसर है। ऐसे में भारत जैसे बड़े और शक्तिशाली देश के प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड जैसे बेहद महत्वपूर्ण देश का दौरा करना यह दिखाता है कि भारत अपने हर साथी को कितनी अहमियत देता है।

नटराज स्कूल ऑफ डांस की डायरेक्टर का नजरिया

सहयोग के मुख्य क्षेत्रों को लेकर नटराज स्कूल ऑफ डांस की डायरेक्टर प्रभा रवि (Prabha Ravi) ने भी अपनी राय साझा की। उनका मानना है कि इस दौरे से व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीक और रक्षा, इन सभी क्षेत्रों को समान रूप से फायदा होने वाला है। जब दो बड़े देश इस तरह के ऐतिहासिक स्तर पर एक साथ आते हैं, तो व्यापार और निवेश का दायरा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है, खासकर तब जब दोनों देश लगातार द्विपक्षीय बातचीत को आगे बढ़ा रहे हों।

प्रभा रवि ने कहा कि इस दौरे से दुनिया को एक बहुत साफ मैसेज मिल रहा है कि भारत और न्यूजीलैंड अपने इन आपसी कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को एक बहुत ही गंभीर और ऊंचे स्तर पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु की तरह काम करता भारतीय समुदाय

प्रभा रवि (Prabha Ravi) ने इस बात पर भी जोर दिया कि न्यूजीलैंड में रहने वाला भारतीय समुदाय वहां की आबादी का एक बहुत पुराना और अहम हिस्सा रहा है। भारतीय लोग एक सदी से भी ज्यादा समय से न्यूजीलैंड में रह रहे हैं और उन्होंने वहां के बिजनेस, एजुकेशन, हेल्थकेयर, साइंस, स्पोर्ट्स, आर्ट्स और यहां तक की राजनीति में भी बहुत बड़ा और सकारात्मक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड में रह रहे भारतीय सिर्फ वहां काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे अपनी संस्कृति, व्यापारिक सूझबूझ और सार्वजनिक सेवा के जरिए भारत और न्यूजीलैंड के बीच एक बेहद मजबूत और जीवंत ब्रिज (सेतु) की भूमिका निभा रहे हैं, जो दोनों देशों को हमेशा करीब बनाए रखता है।

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