UP STF की बड़ी कामयाबी: Ambedkar Nagar मुठभेड़ में 1 लाख का इनामी बदमाश Asif Ali ढेर

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UP STF की बड़ी कामयाबी: उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में UP STF को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। एसटीएफ की टीम ने मंगलवार सुबह करीब 4 बजे Ambedkar Nagar जिले में एक बड़े एनकाउंटर के दौरान कुख्यात छैमार गैंग के सरगना आसिफ अली को मार गिराया है। 40 साल का आसिफ अली लंबे समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था और उस पर जौनपुर पुलिस की तरफ से एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित था। यह मुठभेड़ जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर जगदीशपुर गांव के पास हुई, जहां खुद को घिरा देखकर बदमाश ने पुलिस टीम पर गोलियां चलानी शुरू कर दी थीं और जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।

UP STF द्वारा खुद को घिरता देख बदमाश ने की फायरिंग

STF की नोएडा यूनिट को खुफिया सूत्रों से पक्की जानकारी मिली थी कि एक लाख का इनामी बदमाश आसिफ अली किसी नई बड़ी वारदात को अंजाम देने के मकसद से Ambedkar Nagar के ग्रामीण इलाके में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही एसटीएफ के एडिशनल एसपी राजकुमार मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने जगदीशपुर गांव के पास उसकी घेराबंदी की। सुबह के अंधेरे में जब आसिफ को भनक लगी कि पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया है, तो उसने अपनी बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की।

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STF की टीम ने जब उसका पीछा किया, तो उसने अपनी पिस्टल से टीम पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीबारी में एसटीएफ का एक सिपाही दाहिने हाथ में गोली लगने से घायल हो गया। सिपाही को गोली लगने के बाद पुलिस टीम ने भी आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें आसिफ अली के सीने में दो गोलियां लगीं और वह वहीं जमीन पर गिर पड़ा।

पुलिस उसे तुरंत इलाज के लिए पास के जिला अस्पताल ले गई, लेकिन डॉक्टरों की कोशिशों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मौके से पुलिस को एक आधुनिक पिस्टल, 12 बोर का एक देसी तमंचा, कारतूस और एक मोटरसाइकिल बरामद हुई है।

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जानिए क्या था इस शातिर अपराधी का क्राइम पैटर्न

Asif Ali कोई आम अपराधी नहीं था, बल्कि वह एक बेहद क्रूर और शातिर किस्म के गिरोह का संचालन कर रहा था। उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में भी डकैती, लूट और मर्डर के करीब 20 गंभीर मुकदमे दर्ज थे। वह पति-पत्नी की हत्या समेत कुल 6 लोगों की बेरहमी से हत्या करने के मामलों में वांछित चल रहा था।

Asif Ali की वारदातों को अंजाम देने का तरीका बेहद खौफनाक और तय पैटर्न पर आधारित था। वह अपने गुर्गों के साथ रात के वक्त कच्छा-बनियान पहनकर घरों में घुसता था। घर में दाखिल होते ही वह पूरे परिवार को हथियारों के बल पर बंधक बना लेता था और घर में मौजूद सारा कीमती सामान व नकदी लूट लेता था।

इस दौरान अगर परिवार का कोई भी सदस्य जरा सा भी विरोध करता, तो वह उसकी बेरहमी से हत्या कर देता था। सबसे बड़ी बात यह थी कि डकैती और हत्या करने के बाद वह तुरंत अपना नाम और हुलिया बदलकर दूसरे राज्यों या जिलों में जाकर छिप जाता था, जिससे पुलिस को उस तक पहुंचने में सालों लग जाते थे।

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कानपुर के मकनपुर गांव में झोपड़ी डालकर रहता था परिवार

पुलिस की तफ्तीश में आसिफ अली के अतीत को लेकर भी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। साल 2015 के आसपास आसिफ का पूरा परिवार कानपुर के मकनपुर गांव में एक खाली पड़ी सरकारी जमीन पर घुमंतू जाति की तरह झोपड़ी बनाकर रहता था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसी दौरान जब इलाके में सरकारी पहचान पत्र बनाने का काम चल रहा था, तब इस परिवार ने वहीं का पता देकर अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेज तैयार करवाए थे। उन दिनों आसिफ कुख्यात बावरिया गैंग के लिए काम करता था और अपराध की बारीकियां सीख रहा था।

साल 2015 में ही मकनपुर के पास स्थित खाड़ामऊ गांव में रहने वाले राजा सिंह के घर में एक भीषण डकैती हुई थी। इस वारदात के दौरान बदमाशों की बेरहम पिटाई के कारण राजा सिंह की मौत हो गई थी। जब पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की, तो इसमें आसिफ अली और उसके पारिवारिक भाई काल्लू उर्फ फिरोज का नाम मुख्य आरोपियों के रूप में सामने आया।

पुलिस की दबिश बढ़ते ही आसिफ का पूरा परिवार रातों-रात मकनपुर की झोपड़ी छोड़कर फरार हो गया। तब से लेकर आज तक उस परिवार का कोई भी सदस्य वहां वापस नहीं लौटा। आसिफ के इसी भाई काल्लू उर्फ फिरोज को कुछ समय पहले 6 फरवरी 2026 को अरौल पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिस पर भी 75 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

Asif Ali के खौफनाक वारदातों का काला चिट्ठा

यदि आसिफ अली के आपराधिक इतिहास पर नजर डालें, तो उसकी क्रूरता की कहानी सालों पुरानी है:

  • अक्टूबर 2013 (सुल्तानपुर): आसिफ ने अपने गैंग के 10 से ज्यादा गुर्गों के साथ एक घर में धावा बोला था। वहां पूरे परिवार को बंधक बनाकर लूटपाट की और विरोध करने पर एक सदस्य की हत्या कर दी थी।

  • साल 2014 (जौनपुर): शाहगंज इलाके में एक घर में घुसकर लाखों के जेवर और कैश लूटे। गिरोह ने परिवार के 5 लोगों पर धारदार हथियारों से जानलेवा हमला किया, जिसमें स्वाति और सुमन नाम की दो महिलाओं की अस्पताल में मौत हो गई। इसी मामले के बाद जौनपुर पुलिस ने उस पर एक लाख का इनाम रखा था।

  • अगस्त 2015 (कौशांबी): स्वतंत्रता दिवस के दिन ही इस गैंग ने एक घर में डकैती डाली और बंधक बनाए गए दंपती (पति-पत्नी) को मौत के घाट उतार दिया।

  • अगस्त 2015 (मुजफ्फरनगर): महावीर सिंह नामक व्यक्ति के घर में घुसकर डकैती की और उनकी बहू पर धारदार हथियार से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। उसी रात इस गैंग ने आस-पास के पांच अन्य घरों को भी अपना निशाना बनाया था।

  • जनवरी 2021 (कानपुर देहात): रसूलाबाद इलाके में एक घर में घुसकर तासीम नाम के व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी और लूटपाट की घटना को अंजाम दिया।

क्या है छैमार गैंग और कैसे काम करता है यह गिरोह?

उत्तर प्रदेश और उसके आस-पास के राज्यों में ‘छैमार गैंग’ को एक बेहद खूंखार और बेरहम गिरोह माना जाता है। यह गैंग कच्छा-बनियान गिरोह और बावरिया गिरोह की तर्ज पर ही काम करता है, लेकिन इसके अपने कुछ बेहद कड़े और अजीबोगरीब नियम हैं। इस गिरोह का नाम ‘छैमार’ इसलिए पड़ा क्योंकि इनके नियमों के मुताबिक, गिरोह का सरगना या मुख्य लीडर वही व्यक्ति बन सकता है जिसने कम से कम 6 लोगों की हत्या की हो। गिरोह में किसी अपराधी की हैसियत इस बात से तय होती है कि उसने कितनी क्रूर वारदात को अंजाम दिया है। सबसे ज्यादा क्रूर और हिंसक बदमाश को गिरोह के भीतर “राजकुमार” का दर्जा दिया जाता है।

इस गैंग की कार्यप्रणाली भी काफी सोची-समझी होती है। गिरोह में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी शामिल होती हैं। ये महिलाएं दिन के समय भीख मांगने, कबाड़ या कूड़ा बीनने के बहाने पॉश इलाकों और सीधे-साधे लोगों के घरों की रेकी करती हैं। दिन में निशाना तय होने के बाद, रात को गिरोह के पुरुष सदस्य उस घर के आस-पास झाड़ियों या सुनसान जगहों पर छिपकर बैठ जाते हैं।

पुलिस के अनुसार, वारदात को अंजाम देने से ठीक पहले ये लोग काली माता की पूजा करते हैं और शराब का भोग लगाते हैं। इसके बाद कच्छा-बनियान पहनकर और शरीर पर तेल या ग्रीस लगाकर घरों में घुसते हैं। ये लोग डकैती के दौरान ज्यादातर धारदार हथियारों या लाठी-डंडों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि गोली की आवाज न हो और आस-पास के लोगों को भनक तक न लगे।

UP STF द्वारा Ambedkar Nagar में की गई यह कड़े कानून-व्यवस्था की कार्रवाई क्षेत्र के नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। आसिफ अली जैसे क्रूर और शातिर अपराधी का अंत यह साफ संदेश देता है कि कानून की नजरों से बचकर चाहे कोई कितना भी ठिकाना बदल ले, वह लंबे समय तक सलाखों या पुलिस की कार्रवाई से दूर नहीं रह सकता। छैमार गैंग के इस सरगना के ढेर होने से न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी इस गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने में पुलिस को बड़ी मदद मिलेगी।

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