Siddaramaiah का इस्तीफा और D. K. Shivakumar की एंट्री? कर्नाटक में ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ से पलटेगी सत्ता की बाजी!

Siddaramaiah

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कर्नाटक की राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल मची हुई है। मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान थमती नजर नहीं आ रही है। सियासी गलियारों में यह चर्चा बहुत तेज है कि राज्य के नेतृत्व में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक बैठकों का दौर जारी है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिन कर्नाटक कांग्रेस के लिए काफी अहम होने वाले हैं।

ब्रेकफास्ट मीटिंग पर टिकीं सबकी निगाहें

इस पूरी सियासी उथल-पुथल के बीच गुरुवार सुबह होने वाली एक बैठक को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खबरों के मुताबिक, सीएम Siddaramaiah का इस्तीफा इस बैठक के बाद आ सकता है। दरअसल, Siddaramaiah के कावेरी स्थित सरकारी आवास पर एक ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई गई है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार सुबह-सुबह दिल्ली से बेंगलुरु पहुंचेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी बैठक में Siddaramaiah अपने अगले कदम का आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं। इसके बाद दोनों नेताओं का बेंगलुरु के पार्टी दफ्तर में भी साथ दिखने का कार्यक्रम है।

दिल्ली की मैराथन बैठक के मायने

इससे पहले मंगलवार को दिल्ली के इंदिरा भवन में कांग्रेस आलाकमान की एक लंबी और मैराथन बैठक हुई थी। इस मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला जैसे बड़े दिग्गज शामिल थे। सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी ने साफ किया है कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री के चेहरे का बदलाव वक्त की मांग है, ताकि पार्टी अगले विधानसभा चुनाव के लिए खुद को नए सिरे से तैयार कर सके। आलाकमान ने सिद्धारमैया को भरोसा दिलाया है कि पद छोड़ने के बाद भी राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भूमिका बेहद मजबूत रहेगी और वे पार्टी के सबसे बड़े ओबीसी चेहरे बने रहेंगे।

यह भी पढ़ें: UP जेलों में बड़ा बदलाव: अब अपराधियों को सुधारने के लिए योगी सरकार का ‘Open Jail’ और ‘ओवीओपी’ प्लान

क्यों अचानक शुरू हुआ बदलाव का दौर

दरअसल, कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होते ही कैबिनेट में फेरबदल की बातें सामने आने लगीं। डीके शिवकुमार के समर्थकों का दावा है कि साल 2023 के चुनाव में जीत के बाद ढाई-ढाई साल के कार्यकाल का एक कथित समझौता हुआ था, जिसके तहत अब शिवकुमार को कमान मिलनी चाहिए। हालांकि, Siddaramaiah पहले पूरा कार्यकाल पूरा करने की बात कह चुके हैं। राजनीति के जानकारों का यह भी कहना है कि यदि Siddaramaiah पद पर बने रहते हैं, तो पार्टी बीच का रास्ता निकालते हुए शिवकुमार के भाई डीके सुरेश को राज्यसभा भेजकर संतुलन बनाने की कोशिश कर सकती है।

देखा जाए तो कर्नाटक कांग्रेस के भीतर चल रहा यह सत्ता संघर्ष अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है। गुरुवार को होने वाली ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि कर्नाटक की कमान किसके हाथ में रहेगी। आलाकमान की कोशिश यही है कि जो भी फैसला हो, उससे पार्टी के भीतर कोई गुटबाजी न बढ़े और सरकार बिना किसी रुकावट के चलती रहे।

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