PM Modi in Norway: ओस्लो दौरे में भारत और नॉर्वे ने किए 5 बड़े विज्ञान समझौते

PM Modi in Norway

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PM Modi in Norway: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे (Norway) के सफल आधिकारिक दौरे के बीच भारत और नॉर्वे ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (Science, Technology and Innovation) के क्षेत्र में अपने रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, अपतटीय पवन ऊर्जा (Offshore Wind), संधारणीयता (Sustainability), भू-विज्ञान (Geosciences) और शैक्षणिक अनुसंधान (Academic Research) के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 5 प्रमुख ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

ये सभी समझौते नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में भारत के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) द्वारा नॉर्वे के अग्रणी अनुसंधान, शैक्षणिक और औद्योगिक संस्थानों के साथ किए गए।

सतत विकास और नवाचार को मिलेगी मजबूती

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी विकास और पर्यावरण-अनुकूल टिकाऊ विकास में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करना है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एन. कलैसेल्वी (महानिदेशक, CSIR) ने नॉर्वेजियन पार्टनर संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ किया।

दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित हुए पांचों समझौते

अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लिए मुख्य समझौता (MoU)

DSIR/CSIR और नॉर्वे की अनुसंधान परिषद (Research Council of Norway) के बीच एक मुख्य समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता जलवायु, स्वच्छ ऊर्जा, महासागरों और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े क्षेत्रों में संयुक्त कार्यशालाओं (Workshops), सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास परियोजनाओं, वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान दौरों और कार्यक्रम-आधारित सहयोग को बढ़ावा देगा।

सर्कुलर इकोनॉमी और सस्टेनेबिलिटी पार्टनरशिप (2026-2029)

साल 2014 में स्थापित मौजूदा ढांचे के तहत, CSIR ने नॉर्वे के अग्रणी स्वतंत्र अनुसंधान संगठन SINTEF के साथ वर्ष 2026-2029 के लिए एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) और टिकाऊ पहलों पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिसमें बायो-आधारित सामग्री, नवाचार केंद्र, महासागर ऊर्जा, अपतटीय पवन ऊर्जा, कार्बन कैप्चर, स्टोरेज (भंडारण) और अपशिष्ट मूल्य निर्धारण शामिल हैं।

महासागर और फ्लोटिंग अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजना

अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई CSIR संस्थानों और SINTEF संस्थानों के बीच एक प्रोजेक्ट-विशिष्ट सहयोग समझौता किया गया है।

  • इन तकनीकों पर फोकस: यह कार्यक्रम मुख्य रूप से फ्लोटिंग अपतटीय पवन प्रौद्योगिकियों (Floating Offshore Wind), ऊर्जा लागत को कम करने, स्थिरता मानकों, पायलट प्रदर्शनों, कौशल विकास और औद्योगिक विकास पर केंद्रित होगा।

  • भागीदार संस्थान: इस परियोजना में भारत की ओर से CSIR-स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग रिसर्च सेंटर, CSIR-नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेटरीज, CSIR-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान और CSIR-फोर्थ पेराडाइम इंस्टीट्यूट शामिल हैं। नॉर्वे की तरफ से SINTEF Ocean, SINTEF Digital, FME NorthWind और SINTEF Community हिस्सा ले रहे हैं। इस परियोजना के लिए CSIR की ओर से लगभग ₹3.41 करोड़ की फंडिंग सहायता दी जा रही है।

‘ग्रीन शिफ्ट’ के लिए संयुक्त घोषणा पत्र

CSIR, वैज्ञानिक और अभिनव अनुसंधान अकादमी (AcSIR) और नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NTNU) के बीच “सस्टेनेबिलिटी, सर्कुलर इकोनॉमी और ग्रीन शिफ्ट के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग” नामक एक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता छात्रों और संकायों (Faculty) के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान और बुनियादी ढांचा इंजीनियरिंग को बढ़ावा देगा।

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भू-विज्ञान और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए समझौता

भारत में बुनियादी ढांचा (Infrastructure) परियोजनाओं के लिए भू-विज्ञान आधारित समाधान विकसित करने के लिए CSIR-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (NGRI) ने एमेरल्ड जियोमॉडलिंग (Emerald Geomodelling) के साथ एक 5 वर्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत भारत में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, भूभौतिकीय सर्वेक्षण, डेटा मॉडलिंग, तकनीकी सलाहकार सहायता और वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मील का पत्थर

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि ये समझौते भारत-नॉर्वे सहयोग में एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। इनसे न केवल दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारियां मजबूत होंगी, बल्कि नवाचार के नेतृत्व में पर्यावरण-अनुकूल और सतत विकास (Sustainable Development) को भी बढ़ावा मिलेगा।

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