UP Health Department Action: लापरवाही पर डिप्टी सीएम का हंटर, 5 डॉक्टर बर्खास्त

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UP Health Department Action: उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार अब पूरी तरह से एक्शन मोड में है। आए दिन अस्पतालों से लापरवाही की खबरें आती रहती हैं, लेकिन इस बार UP Health Department Action ने साफ कर दिया है कि काम में ढिलाई अब महंगी पड़ने वाली है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सख्त रुख अपनाते हुए 5 डॉक्टरों को सीधे सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कदम उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अपनी ड्यूटी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

ड्यूटी से गायब रहना पड़ा भारी

प्रदेश में कई ऐसे मामले सामने आ रहे थे जहाँ डॉक्टर बिना किसी सूचना के लंबे समय से अपनी ड्यूटी से गायब थे। UP Health Department Action के तहत गोरखपुर, कुशीनगर, बलरामपुर, अमेठी और औरैया के एक-एक डॉक्टर को उनकी लगातार अनुपस्थिति के कारण नौकरी से निकाल दिया गया है। सरकार का मानना है कि जब डॉक्टर ही अस्पताल में नहीं होंगे, तो गरीब मरीजों का इलाज कैसे होगा? इसीलिए इन अधिकारियों पर यह कड़ी कार्रवाई की गई है।

सीएमओ और बड़े अधिकारियों पर भी गिरी गाज

सिर्फ छोटे पद के डॉक्टर ही नहीं, बल्कि इस बार UP Health Department Action की जद में बड़े अधिकारी भी आए हैं। अंबेडकर नगर के सीएमओ और डिप्टी सीएमओ पर आरोप है कि उन्होंने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ी की। शिकायतों की जांच जब एडीएम स्तर की कमेटी ने की, तो आरोप सही पाए गए। इसके अलावा हरदोई के चिकित्सा अधीक्षक पर भी अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर जांच बिठा दी गई है।

UP Health Department Action

मरीजों के इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट कहा है कि अस्पताल मरीजों की सेवा के लिए हैं, न कि भ्रष्टाचार या लापरवाही के लिए। सुल्तानपुर के लम्भुआ सीएचसी में एक महिला मरीज के इलाज में हुई चूक पर भी UP Health Department Action देखने को मिला है। यहाँ के तत्कालीन अधीक्षक और फार्मासिस्ट के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। प्रयागराज और मथुरा में भी प्रशासनिक लापरवाही और गलत रिपोर्ट बनाने वाले डॉक्टरों पर सख्त रुख अपनाया गया है।

अनुशासन और पारदर्शिता पर जोर

स्वास्थ्य विभाग में सुधार लाने के लिए सरकार ने न केवल बर्खास्तगी की है, बल्कि कई अधिकारियों की सैलरी रोकने और उनके खिलाफ जांच शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं। UP Health Department Action का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले हर व्यक्ति को उचित और समय पर इलाज मिले। डिप्टी सीएम ने साफ कर दिया है कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में यह UP Health Department Action एक स्वागत योग्य कदम है। जब तक सिस्टम में जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक आम आदमी को सही सुविधाएं मिलना मुश्किल है। उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद अस्पतालों के अनुशासन में सुधार होगा और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

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