आजकल डिजिटल दौर में जितनी सुविधाएं बढ़ी हैं, उतनी ही सावधानी बरतने की भी जरूरत है। अक्सर हम किसी काम के लिए अपने जरूरी दस्तावेज दूसरों को सौंप देते हैं, लेकिन यही लापरवाही भारी पड़ सकती है। Kanpur से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ लोगों की मदद करने के नाम पर उनके साथ करोड़ों का खेल कर दिया गया। पुलिस ने एक बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
पश्चिम बंगाल से कानपुर लौटते ही गिरफ्तारी
इस पूरे मामले का मुख्य किरदार महफूज अली है, जो पुलिस से बचने के लिए काफी समय से पश्चिम बंगाल में छिपा हुआ था। पुलिस को जैसे ही उसके Kanpur लौटने की भनक लगी, उन्होंने घेराबंदी शुरू कर दी। आखिरकार, सेंट जोसेफ स्कूल के पास से पुलिस ने उसे दबोच लिया। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जो खुलासे हुए, उन्होंने जांच टीम को भी हैरान कर दिया है।
दस्तावेजों का खेल और फर्जी फर्में
जांच में यह बात सामने आई है कि महफूज और उसके साथी सीधे-साधे लोगों को अपना शिकार बनाते थे। वे लोगों को कम ब्याज पर बैंक से लोन दिलाने या अच्छा बीमा कराने का लालच देते थे। इसी बहाने वे लोगों से उनके पैन कार्ड और जैसे जरूरी कागजात ले लेते थे।
लेकिन खेल यहाँ से शुरू होता था। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल करके पीड़ितों की जानकारी के बिना उनके नाम पर ‘आरती इंटरप्राइजेज’ और ‘राजा इंटरप्राइजेज’ जैसी कई फर्जी GST फर्में बना दी गईं। Kanpur पुलिस के मुताबिक, महफूज ने अपने परिवार और करीबियों के नाम पर लगभग 68 बैंक खाते खुलवाए थे, जिन्हें वह खुद मैनेज करता था।
करोड़ों का संदिग्ध लेनदेन
जब पुलिस ने बैंक खातों की वित्तीय जांच की, तो आंकड़े चौंकाने वाले थे। ‘अफीसा इंटरप्राइजेज’ नाम की फर्म के जरिए करीब 146 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन पाया गया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि यह पैसा ज्यादातर स्लॉटर और स्क्रैप (कबाड़) के कारोबार से जुड़ा था। वह इन फर्जी फर्मों के जरिए पैसा अपने खातों में मंगवाता था और फिर कैश निकालकर संबंधित लोगों को वापस कर देता था। इसके बदले में वह मोटा कमीशन वसूलता था। Kanpur पुलिस अब इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत की भी गहराई से जांच कर रही है।
मास्टरमाइंड और पूरा नेटवर्क
महफूज ने पूछताछ में कई बड़े नाम उगले हैं। उसने बताया कि इस पूरे जाल का मास्टरमाइंड एक अधिवक्ता फिरोज खान है, जो कानूनी पेचीदगियों का फायदा उठाकर फर्जी फर्में तैयार कराता था। Kanpur के इस अपराधी पर पहले से ही धोखाधड़ी और रंगदारी जैसे आधा दर्जन मामले दर्ज हैं। फिलहाल, पुलिस इस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है ताकि बाकी दोषियों को भी पकड़ा जा सके।
Kanpur की यह घटना हमें सबक देती है कि अपने निजी दस्तावेज जैसे पैन कार्ड या आधार की जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें। अगर आप भी किसी को लोन या बीमा के लिए कागज दे रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि उसका गलत इस्तेमाल न हो। पुलिस की सक्रियता से एक बड़ा घोटाला सामने तो आया है, लेकिन सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
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