World Biofuel Day 2026 : आज के समय में जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। वैश्विक तापमान का बढ़ना, पर्यावरण का बिगड़ता संतुलन और प्राकृतिक आपदाएं हम सभी को प्रभावित कर रही हैं। इस संकट की सबसे बड़ी वजह जीवाश्म ईंधन का अंधाधुंध इस्तेमाल है। ऐसे में पारम्परिक ईंधन के विकल्प के रूप में जैव ईंधन यानी बायोफ्यूल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी जरूरत और महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 10 अगस्त को विश्व जैव ईंधन दिवस मनाया जाता है।
क्यों मनाया जाता है विश्व जैव ईंधन दिवस?
भारत में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा साल 2015 से हर साल 10 अगस्त को यह दिवस मनाया जा रहा है। यह खास दिन वैज्ञानिक सर रुडोल्फ डीजल के ऐतिहासिक शोध प्रयोग को भी सम्मान देता है। उन्होंने 8 अगस्त 1893 को पहली बार मूंगफली के तेल से इंजन चलाया था। उनके इस प्रयोग ने सिद्ध कर दिया था कि आने वाले समय में वनस्पति तेल जीवाश्म ईंधन की जगह ले सकते हैं।
बायोफ्यूल पर राष्ट्रीय नीति 2018 और इसके लक्ष्य
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 को मंजूरी दी गई थी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल और डीजल में बायोडीजल का सम्मिश्रण बढ़ाना है।
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इथेनॉल सम्मिश्रण: सरकार ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल सम्मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं।
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अपशिष्ट से ऊर्जा: इस नीति के तहत कृषि अवशेष, नगरपालिका ठोस कचरे और गोबर का उपयोग करके जैव ईंधन तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
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राष्ट्रीय अभियानों को बढ़ावा: यह नीति मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान और किसानों की आय बढ़ाने जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों से सीधे जुड़ी हुई है।
जैव ईंधन से मिलने वाले प्रमुख लाभ
जैव ईंधन केवल पर्यावरण को बचाने का साधन नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा वरदान साबित हो रहा है। इसके प्रमुख फायदे निम्नलिखित हैं:
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आयात निर्भरता में कमी: कच्चे तेल के आयात में कमी आने से देश की विदेशी मुद्रा की भारी बचत होती है।
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पर्यावरण संरक्षण: पारंपरिक ईंधन की तुलना में जैव ईंधन से कार्बन उत्सर्जन बहुत कम होता है, जिससे प्रदूषण नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
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किसानों की आय में बढ़ोतरी: कृषि अवशेषों और पराली का उपयोग बायोफ्यूल बनाने में होने से किसानों को उनकी फसल के बचे हुए हिस्से का भी सही दाम मिल पाता है।
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रोजगार के नए अवसर: इथेनॉल डिस्टिलरीज और बायोफ्यूल प्लांट्स की संख्या बढ़ने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
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