Varanasi News : सावन के इस पवित्र महीने में अगर आप बाबा विश्वनाथ के दर्शन या काशी के घाटों पर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है। दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी ऊपर चढ़ रहा है, जिसकी वजह से प्रशासन को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े हैं। आइए जानते हैं कि इस समय काशी में क्या-क्या बदलाव हुए हैं।
खतरे के निशान से नीचे, लेकिन रफ्तार तेज
पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हो रही लगातार बारिश की वजह से वाराणसी में गंगा का जलस्तर 63.78 मीटर तक पहुंच गया है। हालांकि यह आंकड़ा अभी चेतावनी बिंदु 70.24 मीटर से लगभग 6.48 मीटर नीचे है, लेकिन जिस तेजी से पानी बढ़ रहा है, उसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जलस्तर बढ़ने के कारण सुरक्षा के लिहाज से छोटी-बड़ी करीब 3,000 नावों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब केवल बड़े क्रूज ही चल सकेंगे।
गंगा का पानी अब घाटों की सीढ़ियों को पार करता हुआ ऊपर तक आ गया है। इस वजह से काशी के सभी 90 घाटों का एक-दूसरे से संपर्क कट गया है। अब आप सीढ़ियों के रास्ते एक घाट से दूसरे घाट तक पैदल नहीं जा सकते हैं। दशाश्वमेध घाट का निचला हिस्सा भी पूरी तरह डूब चुका है, जिसके चलते विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती का स्थान बदलना पड़ा है और इसे काफी पीछे शिफ्ट कर दिया गया है।
बंद हुआ काशी विश्वनाथ मंदिर का गंगा द्वार
जलस्तर बढ़ने का सबसे बड़ा असर श्रद्धालुओं पर पड़ा है। ललिता घाट से होते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश देने वाला ‘गंगा द्वार’ रविवार देर शाम से पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पानी गंगा द्वार की सीढ़ियों तक पहुंच गया है, इसलिए अब वहां से प्रवेश नहीं मिल सकेगा। इसके अलावा मणिकर्णिका घाट पर भी पानी काफी ऊपर आ गया है, जिससे शवदाह स्थल को ऊपर की ओर शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है।







