Viksit Bharat-G RAM G Yojana: देश के गांवों की तस्वीर बदलने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ग्रामीण भारत के विकास को एक नई रफ्तार देने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इसी सिलसिले में केंद्रीय ग्रामीण विकास व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक ली है।
इस उच्चस्तरीय बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री और अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य मकसद ग्रामीण रोजगार, मजदूरों की सुरक्षा और गांवों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना था। सरकार 1 जुलाई 2026 से एक नई ऐतिहासिक व्यवस्था लागू करने जा रही है, जिससे करोड़ों ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। आइए जानते हैं कि इस बैठक में क्या खास फैसले लिए गए और आपके राज्य को विकास के लिए कितना पैसा मिला है।

एक दिन भी बिना काम के न रहे कोई मजदूर
केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने बैठक की शुरुआत में ही एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि यह बदलाव सिर्फ कागजों पर या किसी योजना का नाम बदलने जैसा नहीं है। यह देश के करोड़ों गरीब मजदूरों की आजीविका और उनके पेट से जुड़ा मामला है।
उन्होंने राज्यों को कड़े निर्देश दिए कि नई व्यवस्था में बदलाव के दौरान ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए कि किसी मजदूर को काम न मिले। उन्होंने कहा, “एक दिन भी कोई मजदूर बिना काम के न रहे।” रोजगार की गारंटी, समय पर मजदूरी का भुगतान और मजदूरों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
1.25 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड
गांवों में काम की कमी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने दिल खोलकर बजट जारी किया है। केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने बताया कि मनरेगा के तहत सरकार पहले ही 30 हजार करोड़ रुपये आवंटित कर चुकी है। वहीं इस बैठक के दौरान उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 95,692 करोड़ रुपये के अतिरिक्त अंतरिम आवंटन की घोषणा कर दी।
इन दोनों राशियों को मिला दिया जाए, तो यह पूरा फंड 1.25 लाख करोड़ रुपये से भी ज़्यादा का हो जाता है। यह बड़ी धनराशि देश की करीब 2.80 लाख ग्राम पंचायतों तक सीधे पहुंचेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि देश की हर छोटी-बड़ी पंचायत के पास विकास कार्यों के लिए लाखों रुपये का फंड उपलब्ध होगा। इस पैसे से गांवों में नए तालाब, सड़कें, कूप और अन्य जरूरी सरकारी संपत्तियों का निर्माण किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

विकसित भारत-ग्रामीण भारत (Viksit Bharat-G RAM G) का लक्ष्य और डिजिटल तैयारी
सरकार का मानना है कि जब तक हमारे गांव आत्मनिर्भर और मजबूत नहीं होंगे, तब तक देश का पूर्ण विकास संभव नहीं है। इसी विकसित भारत-ग्रामीण भारत के सपने को पूरा करने के लिए सरकार ने तकनीकी स्तर पर भी कई बड़े बदलाव किए हैं।
बैठक में जानकारी दी गई कि भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों को रोकने के लिए अब काम पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा रहा है। इसके लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), मोबाइल पर SMS आधारित सूचना प्रणाली, श्रमिकों का e-KYC और फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरा पहचानकर उपस्थिति दर्ज करना) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई राज्यों ने इस डिजिटल सिस्टम को अपनाने में बहुत अच्छा काम किया है।
Shivraj Singh Chouhan ने बताया कि देश के 26 राज्यों ने इस नई व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अपने बजट में जरूरी वित्तीय प्रावधान भी कर लिए हैं। हालांकि, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिजोरम जैसे राज्यों ने अभी यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, इसलिए केंद्रीय मंत्री ने उनसे जल्द से जल्द इसे पूरा करने को कहा है और वे इसके लिए खुद इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी भी लिख रहे हैं।

राज्यों को दिए गए कुछ सख्त निर्देश
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने सभी राज्य सरकारों को नसीहत दी है कि वे अपने-अपने स्तर पर जल्द से जल्द राज्य स्तरीय अधिसूचना जारी करें। मिजोरम, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश ने यह काम पहले ही कर लिया है, जिसकी बैठक में तारीफ भी की गई। इसके अलावा राज्यों को कुछ जरूरी काम तुरंत करने को कहे गए हैं:
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खेती के पीक सीजन (कटाई-बुआई का समय) को ध्यान में रखकर प्लानिंग करना।
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सभी मजदूरों का 100 प्रतिशत e-KYC पूरा करना।
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जिला और ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाना ताकि वे नई व्यवस्था को अच्छे से समझ सकें।
उन्होंने यह भी साफ किया कि गांवों में कौन से काम पहले किए जाने हैं, इसका फैसला पूरी तरह से ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के माध्यम से ही होगा। गांव के लोग मिलकर जो प्रस्ताव पास करेंगे, उसी के आधार पर विकास कार्यों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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राज्यों को वित्तीय आवंटन: जानिए किसे क्या मिला
इस बैठक में राज्यों को वित्तीय आवंटन की पूरी सूची भी जारी की गई, ताकि हर राज्य अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे सके। आइए प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिले फंड पर एक नजर डालते हैं:
प्रमुख राज्यों का अंतरिम आवंटन (करोड़ रुपये में):
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उत्तर प्रदेश: 9,721.48 करोड़ रु.
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पश्चिम बंगाल: 8,508.00 करोड़ रु.
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तेलंगाना: 3,825.31 करोड़ रु.
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तमिलनाडु: 7,585.49 करोड़ रु.
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राजस्थान: 7,581.87 करोड़ रु.
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आंध्र प्रदेश: 7,707.21 करोड़ रु.
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बिहार: 6,715.83 करोड़ रु.
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मध्य प्रदेश: 6,252.03 करोड़ रु.
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कर्नाटक: 5,709.90 करोड़ रु.
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महाराष्ट्र: 4,420.32 करोड़ रु.
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ओडिशा: 3,763.80 करोड़ रु.
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छत्तीसगढ़: 3,354.85 करोड़ रु.
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केरल: 3,136.44 करोड़ रु.
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झारखंड: 2,705.64 करोड़ रु.
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असम: 1,929.70 करोड़ रु.
इसी तरह छोटे राज्यों में भी करोड़ों रुपये बांटे गए हैं, जैसे हिमाचल प्रदेश को 1,203.28 करोड़, उत्तराखंड को 626.43 करोड़ और हरियाणा को 590.19 करोड़ रुपये मिले हैं। सभी राज्यों को मिलाकर कुल 95,692.31 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं।

केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) का आवंटन:
केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कुल 1,291.52 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा जम्मू-कश्मीर को 1,151.2 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा लद्दाख को 85.98 करोड़, पुडुचेरी को 40.56 करोड़, दादरा और नगर हवेली को 9.02 करोड़, अंडमान-निकोबार को 4.44 करोड़ और लक्षद्वीप को 0.32 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
इन सबके अलावा, पूरी व्यवस्था की निगरानी, सोशल ऑडिट और केंद्रीय प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए 1,850.62 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं।
दिल्ली में सजेगा राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन
केंद्रीय मंत्री ने सभी राज्यों को आने वाली 28 और 29 जून को दिल्ली के पूसा संस्थान में होने वाले ‘राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन’ में आने का न्योता भी दिया है। इस दो दिवसीय सम्मेलन में सभी राज्यों के प्रतिनिधि एक साथ बैठेंगे और 1 जुलाई से लागू होने वाली इस व्यवस्था को बिना किसी गड़बड़ी के जमीन पर उतारने के ब्लूप्रिंट पर आखिरी चर्चा करेंगे।
केंद्र सरकार की यह पहल सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत की बुनियादी तस्वीर बदलने का एक ईमानदार प्रयास है। इतने बड़े पैमाने पर फंड जारी होने से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में परिसंपत्तियों का निर्माण होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर लोगों का पलायन भी रुकेगा। अब यह पूरी तरह राज्यों की मुस्तैदी और उनकी ईमानदारी पर निर्भर करता है कि वे इस भारी-भरकम बजट का इस्तेमाल कितनी तेजी और पारदर्शिता से अपने गांवों को संवारने में करते हैं।
