Varanasi News : वाराणसी में गंगा नदी के जलस्तर में दो दिनों तक स्थिरता रहने के बाद बृहस्पतिवार को गिरावट दर्ज की गई है। बारिश थमने के कारण गंगा के जलस्तर में 5 सेंटीमीटर की कमी आई, जिसके बाद जलस्तर 63.56 मीटर दर्ज किया गया। हालांकि पानी कम होने के बावजूद घाटों का आपस में संपर्क अभी तक पूरी तरह से बहाल नहीं हो पाया है और किनारे के कई छोटे मंदिर अभी भी पानी में डूबे हुए हैं।
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश थमने से घटा जलस्तर
गंगा के जलस्तर में जुलाई के अंतिम सप्ताह से ही लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही थी। अगस्त की शुरुआत में पहाड़ी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश की वजह से गंगा का पानी तेजी से बढ़ा था। सोमवार को जलस्तर 63.78 मीटर तक पहुंच गया था, जो मंगलवार को स्थिर रहा और बुधवार को इसमें 17 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। इसके बाद बृहस्पतिवार को 5 सेंटीमीटर की और गिरावट आई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में दोबारा तेज बारिश होती है, तो जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
नौका संचालन शुरू होने से नाविकों के चेहरे खिले
गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने नौका संचालन पर रोक लगा दी थी, जिसे बृहस्पतिवार को दोबारा शुरू कर दिया गया। नौका संचालन बहाल होने से काशी के नाविक समाज में बेहद खुशी का माहौल है। ‘मां गंगा निषादराज सेवा समिति’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद कुमार निषाद ने नौका संचालन की अनुमति देने पर जिला प्रशासन का आभार जताया है।
नाविकों को सुरक्षा उपकरण साथ रखने के सख्त निर्देश
नाव संचालन शुरू होने के साथ ही नाविकों को यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। काशी के सभी 84 घाटों समेत रामनगर, सूजाबाद और सरायमोहाना क्षेत्र के नाविकों को अपनी नावों में लाइफ जैकेट, रस्सी और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य रूप से रखने को कहा गया है। इसके अलावा किसी भी श्रद्धालु या कांवड़िए के आपात स्थिति में फंसने पर तुरंत बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
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