डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों और छोटे दुकानदारों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI लेनदेन पर शुल्क या मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाए जाने की खबरें चल रही थीं। इन सभी अफवाहों और चर्चाओं पर अब पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है।
पीसीआई ने आधिकारिक बयान जारी कर यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि आम जनता और छोटे कारोबारियों के लिए यूपीआई सेवा पहले की तरह ही पूरी तरह मुफ्त रहेगी।
उपभोक्ताओं से शुल्क लेने का कोई प्रस्ताव नहीं
डिजिटल लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे। इस पर PCI ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि 2016 में जब से यूपीआई की शुरुआत हुई है, तब से यह आम उपभोक्ताओं के लिए एकदम मुफ्त रहा है।
संगठन ने कहा कि आम नागरिकों से UPI पेमेंट पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क वसूलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। देश का हर नागरिक बिना किसी परेशानी या अतिरिक्त चार्ज के तुरंत डिजिटल भुगतान की इस सुविधा का लाभ उठाना जारी रख सकता है।
छोटे कारोबारियों पर लागू नहीं है MDR
कई छोटे व्यापारियों के मन में यह डर था कि शायद अब उन्हें ग्राहकों से यूपीआई से पैसे लेने पर एमडीआर चार्ज देना पड़ेगा। लेकिन पीसीआई ने साफ कर दिया है कि छोटे कारोबारियों पर कोई एमडीआर लागू नहीं होता है।
UPI का मूल उद्देश्य ही देश के छोटे-छोटे व्यापारियों, जैसे किराना दुकानों, रेहड़ी-पटरी वालों और सूक्ष्म उद्यमों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। इसलिए उन्हें बिना किसी अतिरिक्त लागत के इस भुगतान प्रणाली का उपयोग करने की छूट दी गई है, जिससे देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है।
डिजिटल ढांचे को टिकाऊ बनाने पर चर्चा
फिर सवाल उठता है कि आखिर फीस को लेकर यह पूरी बहस क्यों शुरू हुई? दरअसल, पीसीआई के मुताबिक हर महीने अरबों का लेनदेन संभालने वाले इस विशाल डिजिटल इकोसिस्टम के रखरखाव और भविष्य के विकास पर काफी खर्च होता है।
आरबीआई, एनपीसीआई, बैंकों और फिनटेक कंपनियों ने पिछले एक दशक में इस नेटवर्क को तैयार करने में भारी निवेश किया है। जैसे-जैसे यूजर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने के इंतजाम और नई तकनीकों को जोड़ने की जरूरत भी बढ़ रही है। इंडस्ट्री में चर्चा इसी बात को लेकर हो रही है कि इस इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से कैसे टिकाऊ बनाया जाए, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया का असर आम लोगों या छोटे कारोबारियों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा।







