UPI 10 Years : UPI के 10 साल पूरे, भारत की डिजिटल क्रांति ने रचा नया इतिहास

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UPI 10 Years : अगर आज की तारीख में हमसे कोई कहे कि घर से बाहर निकलते समय अपना वॉलेट या कैश भूल जाओ, तो शायद हमें ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे मोबाइल फोन में यूपीआई मौजूद है। भारत में डिजिटल क्रांति की पहचान बन चुके UPI के 10 साल पूरे हो चुके हैं। साल 2016 में बेहद छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म आज न सिर्फ देश के हर कोने में पहुंच चुका है, बल्कि दुनिया भर में भारत का डंका बजा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस खास मौके पर देशवासियों को बधाई दी है और इसे भारत की डिजिटल यात्रा का सबसे बड़ा मोड़ बताया है।

सालाना ट्रांजैक्शन में 13,000 गुना की ऐतिहासिक बढ़ोतरी

यूपीआई की सफलता का अंदाजा आप सिर्फ इसके आंकड़ों से लगा सकते हैं। जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब साल 2016-17 में करीब 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन ही दर्ज किए गए थे। लेकिन आज यह आंकड़ा बढ़कर 2,41,620 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। यानी बीते 10 सालों में इसमें लगभग 13,000 गुना का शानदार उछाल देखा गया है। वहीं ट्रांजैक्शन वैल्यू भी 0.07 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 314 ट्रिलियन रुपये पहुंच चुकी है। आज भारत का यह स्वदेशी सिस्टम दुनिया के 11 देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है।

किसने और कैसे किया था पहला यूपीआई ट्रांजैक्शन? 

इस डिजिटल सफर की शुरुआत 11 अप्रैल 2016 को हुई थी। उस वक्त आरबीआई (RBI) के तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन ने एनपीसीआई (NPCI) के तत्कालीन एमडी और सीईओ ए. पी. होता को 5,000 रुपये ट्रांसफर करके देश का पहला यूपीआई ट्रांजैक्शन किया था। इसके बाद अगस्त 2016 में इसे आम जनता के लिए पूरी तरह से लॉन्च कर दिया गया। आपको यह जानकर गर्व होगा कि आज पूरी दुनिया में होने वाले हर दो रियल-टाइम पेमेंट में से एक अकेले यूपीआई प्लेटफॉर्म के जरिए होता है।

IMPS की चुनौतियों से ऐसे निकला यूपीआई का नया आइडिया

एनपीसीआई के फाउंडिंग चीफ ए. पी. होता के मुताबिक, यूपीआई का विचार आईएमपीएस (IMPS) के इस्तेमाल को बढ़ाने की चुनौतियों से आया था। पहले इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट बैच में होते थे, जबकि छोटे-बड़े व्यापारियों को तुरंत पैसे मिलने की सख्त जरूरत थी। कार्ड पेमेंट में यह सुविधा आसान नहीं थी। इसी समस्या को सुलझाने के लिए एक ऐसे सिस्टम की जरूरत महसूस हुई जो ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी और एपीआई (API) पर काम करे। इसी सोच ने एक नए डिजिटल समाधान को जन्म दिया, जिसे आज हम यूपीआई के नाम से जानते हैं।

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