UP News : उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कलेक्ट्रेट परिसर में अवैध रूप से बनी दो मंजिला मस्जिद को बुलडोजर से ध्वस्त किए जाने के 24 घंटे बाद, जब प्रशासन की टीम मौके से मलबा हटा रही थी, तब उसके नीचे से एक रहस्यमयी कुआं निकला है।
अवैध घोषित की गई इस मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद रविवार सुबह मलबा साफ करने का काम तेजी से चल रहा था। इसी दौरान भारी स्लैब के नीचे यह कुआं दिखाई दिया। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले की शुरुआत कैसे हुई और प्रशासनिक जांच में क्या-क्या बातें सामने आई हैं।
मलबे के नीचे भारी स्लैब और 15 फीट गहरा कुआं
रविवार सुबह जब पोकलेन मशीन से कलेक्ट्रेट परिसर में मलबा हटाया जा रहा था, तब जमीन के नीचे एक बेहद मजबूत और भारी स्लैब मिला। जब पोकलेन से यह स्लैब नहीं टूटा, तो टीम ने कटर की मदद से इसे काटकर अलग किया। स्लैब हटते ही नीचे एक कुआं नजर आया, जिसकी गहराई करीब 15 फीट और चौड़ाई लगभग डेढ़ मीटर बताई जा रही है।
प्रशासनिक टीम और स्थानीय लोग यह देखकर हैरान रह गए। फिलहाल यह कुआं कितना पुराना है और कब बनाया गया था, इसे लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। पुरातत्व और राजस्व विभाग की टीम इस बात की पड़ताल में जुट सकती है।
अदालत के आदेश पर 7 बुलडोजर से ध्वस्त हुई थी मस्जिद
कलेक्ट्रेट में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी इस दो मंजिला मस्जिद पर शनिवार सुबह-सवेरे बड़ी कार्रवाई की गई थी। जिला जज न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस प्रशासन ने मौके पर 7 बुलडोजर लगाकर पूरी संरचना को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था।
इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय ने 16 जुलाई के अपने फैसले में इस निर्माण को पूरी तरह से अवैध करार दिया था। जिसके बाद मस्जिद पक्ष ने जिला जज की अदालत में अपील की थी, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला अदालत ने भी सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी थी।
बजरंग दल के पूर्व संयोजक की शिकायत से शुरू हुई थी जांच
इस पूरे मामले की नींव जनवरी 2025 में पड़ी थी, जब बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक शिकायती पत्र भेजा था। इसमें आरोप लगाया गया था कि कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद पूरी तरह से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाई गई है। शिकायत की प्राथमिक जांच के बाद मार्च 2025 में उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्यासियों की बेदखली) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। राजस्व अभिलेखों की जांच में पाया गया कि यह 315 वर्ग मीटर भूमि वर्ष 1324 और 1359 फसली में कचहरी-कलेक्ट्रेट के नाम दर्ज है। इसके बाद अदालत ने बेदखली के साथ-साथ कब्जाधारी पर भारी-भरकम क्षतिपूर्ति का आदेश भी जारी किया था।
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